इस साल का दूसरा ग्रहण, चंद्रमा पर, 4 अप्रैल को भारत के लगभग कई भागों में दिखेगा। हालांकि एस्ट्रानामी विज्ञान के अनुसार ग्रहण लगना एक खगोलीय घटना है। सूर्य, चंद्र और पृथ्वी जब एक सीध में होते हैं और धरती की परर्छाइं च्रद्र पर पड़े तो चंद्र किरण धूमिल हो जाती है, इसे ही ग्रहण कहते हैं। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णमासी पर ही लगता है और सूर्य ग्रहण अमावस पर ही दिखेगा। पौराणिक काल से राहु और केतु को समुद्र मंथन से जोड़ा गया है और ज्योतिश इन्हें छाया ग्रह मानता है।