कुल्लू - प्रशासन ने दशहरा ग्राउंड में देवी-देवताओं के अस्थायी सीमेंटेड शिविरों को उखाड़ दिया है। अब दशहरे में प्रशासन द्वारा सभी देवी-देवताओं को काठकुणी शैली से निर्मित चौंकियां दी जाएंगीं। शुक्रवार देर शाम को प्रशासन ने मैदान में सीमेंट व संगमरमर के पत्थरों से बीच मैदान में बनाए हुए पक्के अस्थायी शिविरों पर जेसीबी चला दी। प्रशासन द्वारा अब दशहरा मैदान को भी समतल किया जा रहा है। जिससे कि बच्चों को भी खेलने आदि में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दशहरा मैदान में बनाए हुए अस्थायी शिविरों में देवता सिर्फ दशहरा पर्व के दौरान ही बैठते हैं। सात दिवसीय दशहरा पर्व के लिए सभी देवी-देवताओं के देवलुओं ने अस्थायी पक्के शिविरों को बना दिया था,लेकिन साल भर इसकी सही से रख-रखाव नहीं हो पाता था। इतना ही नहीं दशहरे के बाद कभी इन अस्थायी शिविरों पर बच्चे खेलते-खेलते जूतों के साथ चढ़ जाते थे, तो कभी आवारा पशु भी अकसर इन शिविरों पर बैठे रहते हैं। कई बार तो नशे में धुत्त व्यक्ति भी नशा करने के लिए इन अस्थायी शिविरों को बतौर एक टेबल की तरह इस्तेमाल करने लग पड़े थे, जिससे कहीं न कहीं देव आस्था को भी धक्का लग रहा है।
ऐसे में प्रशासन ने इन पक्के अस्थायी शिविरों को हटाकर नई काष्ठकुणी शैली की निर्मित चौंकियों को देने का फैसला किया। इतना ही नहीं जिला प्रशासन द्वारा इस बाबत कारदार संघ के साथ एक बैठक कर उन्हें भी इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। जिला प्रशासन द्वारा लिए गए इस फैसले की न केवल देव समाज के लोगों ने बल्कि शहर के अन्य लोगों ने भी जमकर तारीफ की है।
जिला प्रशासन के द्वारा दशहरे में दी जाने वाली इन बढिय़ा डिजाइन की चौंकियों पर मंत्रों के साथ-साथ देवताओं का नाम व पते के साथ-साथ देवता से जुड़ा थोड़ा बहुत इतिहास भी अंकित किया जाएगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कुल्लू विनय ठाकुर ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि देव समाज के उत्थान के लिए प्रशासन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय दशहरे में काष्ठकुणी शैली की लकड़ी की चौंकियों को दिया जा रहा है।