चंडीगढ़ - ज्योतिशीय दृश्टि से चार अबूझ व स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं जिसमें किया गया कोई भी कार्य चिर स्थाई एवं शुभ माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा तथा दीवाली। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो। यह तिथि भगवान परशुराम जी का जन्मदिन होने के कारण परशुराम तिथि और चिरंजीवी तिथि भी कहलाती है। त्रेता युग का आरंभ भी इसी तिथि से माना गया हैं, अतः इसे युगादितिथि भी कहा गया है।