चंडीगढ़ः पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के सेमिनार हाल वीमन स्टैडीज में बुधवार को समकालीन द़निया में औरत की आवाज विषय पर ओयोजित संगोष्ठी में विषय परिवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार मनीषा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी खासकर लड़कियों को पुरुष के वर्चस्व वाली व्यवस्था से संघर्ष करना होगा। दुनिया में कभी भी आजादी भीख मांगने से किसी भी दौरे में नहीं मिली। भारत में जो आधुनिकता दिखाई दे रही है वह किसी जनजागरण से नहीं आई, बल्कि बाजारवाद से आई है। उन्होंने कहा कि मीडिया में ब्यूरोक्रेसी या फिर पोलिटिक्स से स्त्री दिखती जरूर है। लेकिन वह फैसला नहीं लेती। अगर कहीं स्त्री की आवाज सुनाई देती है तो वह साहित्य में सुनाई देती है। इसलिए नई पीढ़ी को साहित्य की सृजनधर्मिता को आत्मसात करते हुए समाज निर्माण में अपनी भूमिका निश्चित करनी चाहिए। विमर्श को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से आए डाक्टर प्रेम तिवारी ने कहा कि वर्तमान दौर में हमें साहित्य के गौरवशाली सृजनस्मृति को संदर्भित करना चाहिए।