देवभूमि हिमाचल के पारम्परिक व्यंजनों का स्वाद मिल रहा है सरस मेले मे
चंडीगढ़ - सेक्टर 34 स्थित एग्जीबिशन ग्राउंड में हिमाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के रुरल लाईवलीहुड मिशन द्वारा आयोजित किये जा रहे सरस मेले में जहां एक ओर सेल्फ हैल्प ग्रुप के अंतर्गत संगठित महिलायें हस्त निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किये हुये है वहीं दूसरी ओर कुछ महिला उद्यमी अपने प्रदेश के पहाड़ी जायकों का स्वाद भी परोस रही हैं।
प्रदेश के कुल्लू, मंडी, सोलन, शिमला, कांगड़ा, चंबा, उना और बिलासपुर से आई दर्जनों महिलायें स्थानीय व्यंजनों को ताजा पका कर भीड़ जुटा रही हैं। मेले में चंबियाली, मंडयाली, बिलासपुरी और कांगड़ी धाम में राजमाह मदरा, मूंग दाल, खट्टा, मीठे चावल, कद्दू का मीठा, कड़ी, तेलीमाह, लुस्के, पटांडे, अश्कली, कुल्थ की दाल, पहाड़ी अरबी की सब्जी, बिच्छू बूटी का साग, बबरु आदि गरमागरम परोसे जा रहे हैं। विभिनन हैल्प ग्रुप से जुड़ी यह महिलाये बताती है कि कुछ व्यंजनों में लहसुन और प्याज तक का प्रयोग नहीं होता है।
कई व्यंजन खालिस घी से बनाये जाते हैं और कई सरसों के तेल में पकाये जाते हैं। फास्ट फूड के युग में यह महिलायें अपने पारम्परिक भोजन का जीवित रखे हुये है और स्थानीय लोग भी भारी गिनती में यह इन लजीज व्यंजनो का स्वाद ले रहे हैं। आयोजकों के अनुसार आमतौर पर यह व्यंजन विशेष मौकों पर ही बनाये जाते हैं परन्तु इनका स्वाद अब हिमाचल प्रदेश के बाहर में ऐसे आयोजनों के माध्यम से चखा जा रहा है।
मेले में बाजरे के कई व्यंजन देखने को मिल रहे है। मोमोज और सिड्डूू को बाजरे से तैयार किया जा रहा है। जहां एक ओर मोटे अनाज का पुलाव लोगों में अत्याधिक लोकप्रिय हो रहा है वहीं दूसरी ओर लाल चावल से बनी स्वीट डिश का स्वाद लोग जरुर चख रहे हैं जो कि शुगर फ्री भी है। अल्सी और हल्दी के लड्डूओं को लोग पैक कर घर ले जा रहे हैं जबकि गुच्छी के सूप के साथ लोग ठंड में शॉपिंग कर रहे हैं।