चंडीगढ़ - चंडीगढ़ इंडियन सोसाईटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयरकंडीशनिंग इंजीनियर्स (ईशरे) के चंडीगढ़ चैप्टर द्वारा शनिवार को होटल ललित में डिकार्बोनाइजेशन विषय पर एक दिवसीय ‘ऊर्जावान ’ नामक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय ‘एक्सप्लोरिंग इनोवेशन एंड कोलैबोरेशन’ था जिसमें देश भर से एचवीएसीआर के संबंधित भवन उद्योग के शीर्ष विशेषज्ञ, आर्किटेक्ट, बिल्डर, सरकारी अधिकारी, इंजीनियर, डेवलपर्स, सलाहाकार, कंट्रेक्टर जुटे जिन्हें भवन निर्माण में नवीनतम और अत्याधुनिक तकनीकों और रुझानों से अवगत होने का अनूठा अवसर प्राप्त हुआ। प्रतिनिधियों को पेशेवरों के साथ साथ सरकारी संस्थानों जैसे पेडा, पीजीआई, आईआईएसईआर, एससीएल, सीएसआइआर, आईआईटी रोपड़ व अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ विचार साझे किये।
अपने स्वागत संबोधन में ईशरे के अध्यक्ष अनिल सिंह दुग्गल ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिये डिकार्बोनाईजेशन पहल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सम्मेलन का मुख्य फोकस एयर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन उद्योग में डिकार्बोनाईजेशन और उर्जा दक्षता के बारे में अधिक जागरुकता पैदा करना है।
सम्मेलन के संयोजक अनंत सिंह का मत था कि क्लाइमेट गोल्स (लक्ष्यों) की पूर्ति के लिये भवन निर्माण सेक्टर से जुड़े स्टेकहोल्डर्स को एकजुट होकर आपसी सहयोग देना होना।
पेडा के मैनेजर ने बताया कि दुनिया भर में भवन निर्माण सेक्टर उर्जा से संबंधित कार्बन उत्सर्जन (इमेशन) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। बिल्डिंग सेक्टर एक प्रमुख सेक्टर है जिसमें र्प्याप्त जनहित नीतियों का अभाव है जिस पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उर्जा दक्षता में लंबे समय से चली आ रही पहल को डिकार्बोनाईजेशन के निर्माण तक विस्तारित किया जाना चाहिये। प्रदेश स्तर पर इस दिशा में पंजाब एनर्जी डिवपलमेंट अथॉरिटी के प्रयास काफी तेजी से सार्थक सिद्ध हो रहे हैं।
ऊर्जावान में डिकोडिंग डिकार्बोनाइजेशन, शहरी विकास में इंटीग्रेटेड पैसिव कूलिंग, उर्जा संरक्षण, सौर प्रणाली, ग्रीन बिल्डिंग और अन्य संबंधित विषयों पर चर्चा शामिल थी। प्रभात गोयल, विवेक अत्रे, आशीष राखेजा, गौरव शौरी, आर्किटेक्ट सुरेन्द्र बहगा, विशाल गर्ग और अन्य राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वक्ताओं ने विषय पर अपने विचार साझा किये।
भाग ले रहे प्रतिनिधियों ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के रुप में 2070 तक नेट जीरो कार्बोनाइजेशन के लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया।