चंडीगढ़, नैश्नल अवार्ड से नवाजी जा चुकी उभरती हुई गायिका नीलांजना सभ्यासाची ठाकुर ‘नील’ ने अपने मुम्बई स्थित निवास पर अपना पहला म्यिुजिक वीडियो - ‘ये बूंदें ये बारिश’ लांच किया। अपने लांच किये पहले इस म्यिुजिक वीडियो को लांच को उन्होंनें अपने सिंगिंग करियर का एक महत्वपूर्ण ‘मील का पत्थर’ और उपलब्धि बताया।
यह म्यिुजिक पश्चिम बंगाल की खूबसूरत करस्योंग की हसीन वादियों में डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी (डीओपी) अमृता सेन द्वारा फिल्माया गया है जिसमें वीडियो में दो आत्माओं के बीच अनंत प्रेम के भावों को गाने के माध्यम से बखूबी उकेरा गया है। यह म्यूजिक नील ने अपने ही म्यिुजिक लैबल - चोकोचोम्स म्यिुजिक के अंतर्गत लांच किया है। अपने पुराने मित्र और कंपोजर डॉन आचार्य और गीतकार जयशंकर प्रसाद के साथ नील ने यह गाना यूट्यूब के द्वारा लांच किया जिससे संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा है।
जय की काव्य पंक्तियां, द्रोण की मधुर धुनें और नील के भावपूर्ण गायन ने एक ऐसा उत्तम समावेश उत्पन्न किया जिससे की ‘ये बूंदे ये बारिश’ गाने का जन्म हुआ। गाने की रिकॉर्डिंग मून डेका ने मुंबई स्थित स्पेंडिड ऑडियो में की थी जिसे नील के एक अन्य पुराने मित्र कोहिनूर मुखर्जी ने बेहतरीन अंजाम दिया। इस प्रोजेक्ट के बाद नील संगीत की विभिन्न शैलियों को गाने के लिये उत्सुक हैं, जो लोगों के दिलों को छू जाये।
कोलकाता में जन्मी नील ने मात्र चार वर्ष की उम्र से ही अपनी मां दीपाली सरकार से गायन की प्रारम्भिक दीक्षा ली। उनकी प्रतिभा में समय के साथ पैनापन दिखता गया और उनके माता पिता ने उन्हें 11 वर्ष की आयु में गीताबितान में रविन्द्र संगीत सिखने के लिये भेजा।
नील के इस पैशन को गति मिलती रही और उन्होंने इंडियन क्लासिक के लिये सधन चन्द्र राय और सुनील चट्टोपाध्याय से दीक्षा ली जबकि मॉडर्न बंगाली संगीत उन्होंने जटिलेश्वर मुखोपाध्याय से सीखा। वेस्टर्न म्यूजिक में दक्षता उन्हें कार्लटन किटो से प्राप्त हुई। कॉलेज के बाद उन्होंने अपने मित्रों के साथ संजीवनी बैंड बनाया और 2000 में पहली एलबम रिलीज की। दक्षिण अफ्रिका में आयोजित किये गये 2003 क्रिकेट वर्ल्ड कप से पूर्व एक बडा हिट गाना - ‘डेस्टिनेशन वर्ल्ड कप’ तैयार किया। इसके बाद उन्होंनें पीछे मुड़ के नहीं देखा और ग्लोबल प्लेटफार्म पर संगीत प्रेमियों को अपनी आवाज से मंत्रमुग्ध किया। उन्होंनें इस दौरान न्यू यार्क में कारनेज हॉल, टेंगलवुड में ओजावा हॉल और सिंगापुर में एस्पलांद हॉल में 15 बार के ग्रेमी अवार्ड विजेता योयो मा, ग्रेमी विजेता संदीप दास और वू तोंग के साथ अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने आरजे नील के रूप में उच्च कोटि की रेडियो जोकी की अपनी पहचान भी बनाई।
उन्हें राष्ट्र स्तर के कई ईनाम भी अर्जित की जिसमें सबसे महत्वपूर्ण 2009 में बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल के लिये नेशनल अवार्ड शामिल है। उन्हें बिग बांगला म्युजिक अवार्ड और रेडियो जोकी के लिये स्वयंसिद्ध अवार्ड से भी पुरस्कृत किया जा चुका है।
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