चंडीगढ़, 29 मार्च, 2013: विलुप्त होती पारंपरिक हस्तशिल्प कला को सहारा देने के लिए भारत सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग -केवीआईसी- द्वारा हरियाणा में तीन और पंजाब में चार जो ग्रामीण उद्योग समूह स्थापित किये गये हैं, वहां निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों की एक प्रदर्शनी सेक्टर 17-सी के एससीओ 192-93 स्थित ग्राम शिल्प खादी शोरूम में चल रही है। खादी व ग्रामोद्योग के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से चालू माह के अंतिम दिन ऐसी ही एक प्रदर्शनी सुखना लेक पर लगायी जायेगी। खरीदारों व विके्रताओं की एक बैठक 30 मार्च को होनी है। यह घोषणा आज यहां एक प्रेस कांफे्रंस में की गयी।
चंडीगढ़, पंजाब एवं हरियााणा क्षेत्र में केवीआईसी के स्टेट डायरेक्टर श्री करनैल सिंह ने बताया कि देश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। औद्योगिक आउटपुट में इस सेक्टर की भागीदारी 40 प्रतिशत तथा डायरेक्ट एक्सपोर्ट में 35 प्रतिशत है तथा इसने करीब 1.3 करोड़ लोगों को रोजगार दिया हुआ है। भारत में पारंपरिक उद्योगों की एक समृद्ध परंपरा रही है। इनके उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, जिनकी विदेशों में भी काफी मांग रहती है और इनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर ाी पैदा होते हैं।
श्री सिंह ने आगे बताया कि पारंपरिक उद्योगों को अधिक प्रतियोगी और उत्पादक बनाने तथा उनका निरंतर विकास करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने शुरुआती तौर पर रु. 100 करोड़ का एक फंड स्थापित करने की घोषणा की है। इसके तहत स्फूर्ति नाम से रु. 97.25 करोड़ की एक सेंट्रल सेक्टर स्कीम तैयार की गयी है। इसे कें द्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्योग मंत्रालय द्वारा राज्यों के विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के जरिये चलाया जा रहा है।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने हरियााणा एवं पंजाब में सात ग्रामीण समूह या क्लस्टर तैयार किये, जो इस प्रकार है: हैंडमेड पेपर, रादौर-यमुनानगर, वुडन बीड्स, गुरैरा-भिवानी, वूलन खादी, कुरुक्षेत्र, देशी पंजाब जूती, रामपुरा-फजिल्का, फुलकारी, राजपुरा-पटियाला, वुडन हैंडीक्राफ्ट, होशियारपुर तथा वूलन खादी, अमृतसर।
रीजनल सेंटर फॉर एंट्रेपीन्योरशिप डवलपमेंट के प्रमुख सलाहकार श्री परमजीत सिंह ने बताया कि इस योजना से 4,465 कारीगरों को काम मिल रहा है। उनका उत्पादन 50 प्रतिशत बढ़ गया है। साथ ही उनकी आय भी 40 प्रतिशत तक बढ़ गयी है। इसके लिए कुछ योजनाओं के जरिये उनको सहयोग दिया जा रहा है, जैसे कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये क्षमता में वृद्धि, खराब उपकरणों को बदलना, एक ही जगह हर तरह की सुविधाएं प्रदान करने वाले केंद्रों की स्थापना तथा प्रदर्शनियों व मेलों के जरिये बिक्री बढ़ाने के उपाय आदि।
पंजाब एवं हरियाणा में केवीआईसी के तहत 116 संस्थान संचालित हैं। इनमें 43520 व्यक्तियों को रोजगार मिला हुआ है। कुल रु. 9857.86 लाख के निवेश से इन संस्थानों में रु. 8270.69 लाख कीमत के उत्पाद तैयार हो रहे हैं और इनका बिक्री टर्नओवर रु.11042.89 लाख है। दोनों प्रदेशों में केवीआईसी के 296 मार्केटिंग आउटलेट हैं। केवीआईसी केंद्र सरकार द्वारा 2008 में शुरू किये गये प्रधानमंत्री रोजगार कार्यक्रम को लागू कराने में भी योगदान देता है। प्रेस कांफे्रंस में खादी आश्रम के चेयरमैन श्री बृज शर्मा और के.वी.आई.सी. के असिस्टेंट डायरेक्टर श्री ए के गर्ग भी मौजूद थे।