चंडीगढ़ 10 मार्च : केंद्रीय आर्य सभा द्वारा आयोजित महर्षि दयानंद बोधोत्सव धूमधाम से संम्पन से संम्पन हो गया है। कार्यक्रम का शुभारम्भ यज से हुआ।पंजाब यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग के चेयरमैन डॉ० वीरेंदर अलंकार ने प्रवचन के दौरान कहा कि महर्षि दयानंद जी ने देश प्रेम की भावना को प्रबल किया। उन्होंने कहा कि सनातन शास्वत अर्थात हमेशा रहता है। धर्म कि ब्याख्या वेदों से आरम्भ होती है। ज्ञान हमेशा रहता है। ज्ञान की भाषा वेड है। वेड जो कहता है उसे मान लेना चाहिए।
स्वामी दयानंद ने कहा है की उनका सिन्दांत ब्रह्मा पर्यन्त से ज़ेमिनी तक है। अर्थात सब कुछ ऋषि मुनियों की पम्परा है। हमें उनका अनुशरण करना चाहिए। तीर्थ वह हे जो तेरा दे। इस कार्यक्रम में डॉ .शिवदत्त पाण्डेय और द्र. अन्नपूर्णा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर प्रिंसिपलों को सहयोग देने के लिए सम्मानित किया गया। केंद्रीय आर्य सभा के प्रधान रविंदर तलवार ने उपस्थित लोगो का धन्यवाद किया।