चंडीगढ़ - दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 सितंबर तक रोक लगा दी है। मामले में एकल पीठ द्वारा जारी अंतिम संस्कार के आदेश को चुनौती देने वाली चार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया। मंगलवार को भारत सरकार के सॉलिसिएटर जनरल को इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से पेश होना था लेकिन उनकी मां के देहांत के चलते इस मामले में याचिका पर सुनवाई को टालने की अपील की गई थी।
मामले में आशुतोष महाराज के पुत्र दलीप झा के वकील की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि इस मामले में पहले ही बहुत देरी हो चुकी है और ऐसे में लंबे समय तक सुनवाई को न टाला जाए। हाईकोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की है। काबिलेगौर है कि एकल पीठ द्वारा आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को सौंपते हुए 15 दिन के भीतर आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार कड़ी सुरक्षा में करने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट की एकल पीठ के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। पंजाब सरकार ने याचिका दाखिल कर कहा था कि अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को देना सही नहीं है इसे आश्रम को सौंपा जाना चाहिए।
इसके बाद खंडपीठ ने अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी थी। दलीप झा ने याचिका दाखिल कर कहा था कि शव का अंतिम संस्कार पंजाब सरकार द्वारा नहीं किया जाना चाहिए पुत्र होने के नाते यह हक उनका है और उन्हें ही मिलना चाहिए। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने याचिका दाखिल कर कहा था कि आशुतोष महाराज को मृत करार देने का फैसला गलत है और उनकी समाधि में किसी प्रकार का दखल नहीं होना चाहिए। इसी बीच आशुतोष महाराज को मृत करार देते हुए उनके कथित पुत्र दलीप झा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए शव का अंतिम संस्कार करने के लिए उन्हें सौंपने की अपील की थी। पंजाब सरकार ने भी महाराज को क्लीनिकल डेथ माना था। इसके बाद मामले में लंबी सुनवाई का दौर चला और हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम से इनकार करते हुए अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पंजाब सरकार को सौंपी थी। इसके बाद सभी पक्षों ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी।