चंडीगढ़ - चंडीगढ़ मार्किट कमेटी के चेयरमैन व उपचेयरमैन के कल होने वाले चुनाव को लेकर गावों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी निदेशक एकजुट हो गए हैं। इसके चलते भाजपा व कांग्रेस का राजनीतिक गणित गड़बड़ा गया है। चंडीगढ़ मार्किट कमेटी में चुने गए 9 निदेशक हैं, इनमें से गावों का प्रतिनिधित्व करने वाले 6 निदेशक राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हो गये हैं। इस बार आढ़तियों को पछाड़ कर वह अपने में से ही किसी को निदेशक बनाना चाहते हैं। एक वोट सरकारी प्रतिनिधि की भी होती है।
गांव सारंगपुर के सरपंच व पेंडू संघर्ष समिति के नेता साधू सिंह, खुड्डा अली शेर के पूर्व सरपंच बाबा गुरदयाल सिंह, बहलाना के पूर्व सरपंच दर्शन सिंह, हरभजन सिंह कजहेड़ी, मनीमाजरा के कर्म सिंह लम्बरदार व जगतार सिंह जग्गा ने मार्किट कमेटी में गांवों से संबंधित 6 निदेशकों को एकमंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
अब स्थिति यह है कि चुने गए निदेशकों में रामवीर भट्टी, जुझार सिंह बड़हेड़ी, सुकविन्दर सिंह काला कजहेड़ी, कुलविन्दर सिंह किश्नगढ़, गुरप्रीत सिंह खुड्डा अलीशेर व हरजीत सिंह मनीमाजरा ने मार्किट कमेटी से शहर के प्रतिनिधियों को पछाडऩे का निर्णय लिया है। हालांकि यह सभी 6 निदेशक भाजपा अथवा कांग्रेस से जुड़े हैं, पर इस बार गांवों की एकता को इन्होंने पार्टी से ऊपर रखा है। इन लोगों ने अपनी-अपनी पार्टी के निर्देशों को भी मानने से इनकार कर दिया है। अब हालात यह हैं कि पुन: मार्किट कमेटी का चेयरमैन बनने का प्रयास कर रहे कांग्रेस से सब्ज़ी मंडी के प्रतिनिधि, दविन्दर सिंह बबला, भाजपा से आढ़तियों के प्रतिनिधि सुनील गुप्ता तथा पल्लेदारों के प्रतिनिधि सुभाष रंधावा अलग-थलग पड़ गए हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बबला ने चेयरमैन का चुनाव न लडऩे का निर्णय लिया है।