चंडीगढ़ - पर्यावरण के आधारभूत तत्वों जमीन,जल और वायु को श्री गुरू ग्रंथ साहिब में विशेष दर्जा देते हुए पवन को गुरू, पानी को पिता, धरती को माता बताया गया है। आने वाली पीढ़ी के लिए एक साफ सुथरा व उजला पर्यावरण छोड़ कर जाना होगा ताकि वह बता सकें कि पूर्वज बेहतरीन व्यवस्था करके गए। पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट आफ एनवायरमेंट स्टडीज विभाग के सहयोग से आईसीएसएसआर हाल में पर्यावरण संरक्षण के विषय को जोरदार तरीके से उभारा। उसी के दौरान यह विचार उभर कर सामने आए। अभियान से इकोलॉजी बैलेंस को सही करने व उसके विभिन्न पहलुओं पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। विशेषज्ञों के अलावा इस अभियान में सामान्य जनमानस और खासतौर से शहरी व ग्र्रामीणों को शामिल करने पर भी जोर दिया गया। पंजाब के कई इलाकों में भूजल के गंदा होने और पानी में यूरेनियम व अन्य विषैले तत्वों के मिश्रण से फैल रही बीमारियों का भी जिक्र आया जिससे आने वाली पीढ़ी पर असर होने की चेतावनी दी गई। कहा गया कि नदियां प्रदूषित हो रही हैं और ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्रकृति की इस असीम दौलत को अगर नहीं संभाला गया तो नतीजे गंभीर होंगे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. एके भंडारी ने शिरकत की। प्रमुख वक्ता के तौर पर बॉटनी विभाग के पूर्व हैड प्रो. एएस आहलुवालिया, जियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रो. नरेश कोछड़, प्रो. केपी सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. नवदीप गोयल, डीसीडीसी प्रो. नवल किशोर, डीईएस के हैड प्रो हरमिंदर, प्रो. डेजी सहित पर्यावरणविद् डा. अब्बास अली खान ने भाग
लिया। कार्यक्रम का संचालन इनवॉयरमेंट स्टडी डिपार्टमेंट की प्रो. माधुरी शर्मा ऋषि ने किया।