चंडीगढ़ - द ब्रिटिश स्कूल, सेक्टर 12 के बच्चें, अमेरिका स्थित नासा का दौरा कर लौटे हैं। स्कूल के 11 बच्चों ने अमेरिका स्थित नासा का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने रॉकेट लॉन्चिंग, एस्ट्रोनॉट्स, स्पेस से जुड़ी कई अन्य तरह की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के बारे में नजदीक से जानकारी ली। इस मौके पर बच्चों ने कैनेडी स्पेस सेंटर में जाकर सेटेलाइट लॉन्चिंग के बारे में भी जानकारी हासिल की। इसके अलावा एस्ट्रोनॉट्स से बच्चों ने आधुनिक टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर स्पेस को लेकर टॉक शो का भी आयोजन किया गया।
स्कूल की कृषा सेठी ने बताया कि वह आम तौर पर टेलीविजन व इंटरनेट के माध्यम से रॉकेट लॉन्चिंग, एस्ट्रोनॉट्स व स्पेस से जुड़ी जानकारी प्राप्त करती थी, लेकिन इस बार उसने इन सभी चीजों को नजदीक से देखा और उनके बारे में काफी जानकारी भी प्राप्त की। बच्चों का यह ट्रिप 19 जून से 3 जुलाई तक था। शटल की लॉन्चिंग का झटका रहेगा याद स्कूल की कृषा सेठी ने बताया कि अटलांटिस शटल की लॉन्चिंग के बारे में उन्होंने काफी नजदीक से जाना। यही नहीं, उन्हें एस्ट्रोनॉट्स ने इससे जुड़ा डेमो भी दिखाया। कृषा ने बताया कि शटल की लॉन्चिंग के डेमो के दौरान उसे शटल में बिठाया गया और सीट बेल्ट बांधते ही अचानक जोर का झटका लगा और उसे महसूस हुआ जैसे उसके शरीर में वजन नहीं है और वह अंतरिक्ष में तैर रही है। यह सब करीब एक मिनट तक चला। उसने बताया कि उस एक्सपीरियंस को वह कभी भूल नहीं सकती। कुछ सेकंड के लिए जब अंतरिक्ष यान में बैठने के बाद जो झटका महसूस हुआ, वह उसे हमेशा याद रहेगा।
स्कूल के एक छात्र एम रोहित ने बताया कि जब एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में होते हैं तो वे खाना किस तरह खाते हैं, इसके बारे में जानकर वह हैरान रह गया। रोहित ने अनुभव किया कि खाने के लिए तैरते सामान को मुंह से खींचकर अपनी ओर लाना पड़ता है। यही नहीं, अगर प्यास लगी हो तो अंतरिक्ष में बुलबुलों के रूप में तैरते पानी से प्यास बुझानी पड़ती है।