चंडीगढ़ - सिटी ब्यूटीफुल के कई जाने-माने कलाकार व शिक्षाविद आज प्रोफेसर डीएस कपूर के सपने को समर्थन देने के लिए चंडीगढ़ में एकत्र हुए, जहां कला व कलाकारों के गौरव को बढ़ाने की मुहिम ‘जय कलाकार’ की विधिवत लांचिंग की गयी। प्रोफेसर कपूर का सपना है कि ‘जय जवान, जय किसान’ के साथ अब ‘जय कलाकार’ को भी प्रचारित करने का वक्त आ गया है, ताकि कला व कलाकारों को उनका सही हक मिल सके। वे इस मुहिम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ले जाने की इच्छा रखते हैं। इसके लिए उन्हें शहर की सांसद किरण खेर का समर्थन व आश्वासन भी मिल गया है।
कला के इस नवीनतम अभियान को समर्थन देने के लिए जो कलाकार व विद्वान प्रेस कांफे्रंस में मौजूद रहे, उनमें संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन गुरचरण सिंह चन्नी, प्रख्यात शिल्पकार शिव सिंह, टीवी व सिनेमा की जानी-मानी हस्ती सुश्री सविता भट्टी, शिक्षाविद् प्रोफेसर बलविंदर सिंह, मलकित सिंह और जोध सिंह प्रमुख थे। रॉक गार्डन के रचनाकार नेकचंद को भी आना था, परंतु खराब स्वास्थ्य के चलते वे नहीं आ सके, जबकि भाजपा सांसद किरण खेर संसद में व्यस्त होने के कारण नहीं आ पायीं, हालांकि उनका शुभकामना संदेश मिल चुका है।
प्रोफेसर डी एस कपूर चंडीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट के प्रिंसीपल रह चुके हैं और इन दिनों हरियाणा में रोहतक स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन हैं। उन्होंने बताया, ‘जय जवान, जय किसान का नारा 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था। यह जवानों और किसानों के लिए एक सैल्यूट है। यह नारा इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे लेकर देशभक्ति के कई गीतों व फिल्मों की रचना हुई। कलाकार भी तो अपनी कला के जरिये रोजमर्रा के जीवन में हमारी आत्मा पर चढऩे वाली धूल हटाते हैं। कलाकारों के विशेष योगदान को सलाम करने के लिए ही मैं चाहता हूं कि अब ‘जय कलाकार’ नारे को स्थापित करने का वक्त आ गया है।’
उन्होंने आगे कहा कि कला हमारी आत्मा को स्पर्श करती और प्रभावित करती है। यह हमारी कठिनाइयों को कम करने में हमारी मदद करती है। यह भौतिक वस्तुओं के प्रति हमारे मोह और मन में छिपे अज्ञात भय को कम करती है और हमें भीतर से सुकून प्रदान करती है। कला उम्मीदें पैदा करती है, प्रेम पैदा करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी प्रार्थना है कि ‘जय कलाकार’ नारे को स्थापित करने की पहल करें और कलाकारों का मान बढ़ाएं।
प्रोफेसर डी एस कपूर की तीन पीढिय़ां शिक्षा देने का कार्य करती आ रही हैं। कला और सौंदर्य की समझ उन्हें दादा सुंदर सिंह और पिता सुजान सिंह से विरासत में मिली। हर साल लगने वाले चंडीगढ़ कार्निवल में चलती-फिरती झांकियों और 60 फिट ऊंचे आइफल टॉवर के मॉडल का आइडिया प्रोफेसर कपूर का ही था। पंजाब के राज्यपाल उन्हें तीन बार स्टेट अवार्ड प्रदान कर चुके हैं और कला के क्षेत्र में विशिष्ट सेवाओं के लिए चंडीगढ़ ललित कला अकादमी भी उन्हें सम्मानित कर चुकी है। प्रोफेसर कपूर चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के सम्मानित सदस्य, इंटैक इंडिया के आजीवन सदस्य और स्पिकमैके के सक्रिय सदस्य हैं। कला व कलाकारों का कद बढ़ाना ही अब उनका मिशन है।