चण्डीगढ़ - नैतिक गुणों वाले बच्चे घर-समाज-देश में अनुशासन स्थापित करते हैं जबकि इन गुणों से वंचित रहने वाले बच्चे परेशानी का कारण बनते हैं, इसके लिए हर माता पिता का यह परम कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को बचपन में ही सत्संग-सेवा-सिमरन से जोड़ें व ब्रह्मज्ञान भी प्रदान करवायें ताकि उनमें बचपन से ही नैतिक गुण प्रवेश करें जिससे बच्चों का कोमल ह्रदय सुन्दर फूलों की कली जैसा बने रहे, कभी कांटों में न बदल जाए ये उद्गार आज यहां सैक्टर 30-ए में स्थित हुए बाल समागम में उपस्थित सैकड़ों बच्चों व श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यहां के ज़ोनल इन्चार्ज डा0 बी0 एस0 चीमा ने व्यक्त किए ।
इस बाल समागम में नन्हें-नन्हें बच्चों और नौजवानों ने अनेक भाषाओं का सहारा लेते हुए गीत, कविता, स्किट, भाषण आदि द्वारा कई आईटम्ज़ पेश की जिनमें उन द्वारा धार्मिक विचारधारा पर आधारित नैतिक गुण जैसे कि प्रीत, प्यार, नम्रता, करूणा, दया, सत्कार, सहनशीलता आदि की चर्चा की गई । बच्चों ने अपनी आईटम्ज़ में समाज व देश में फैली बुराईयां जैसे कि नशा, कन्या भ्रूण हत्या, ग्लोबल वार्मिंग जैसे विषयों की चर्चा करते हुए बताया कि इन बुराईयों से केवल अध्यात्मिक जागृति ही बचा सकती है ।
इस अवसर पर यहां के संयोजक मोहिन्द्र सिंह जी ने ज़ोनल इन्चार्ज डा0 बी0 एस0 चीमा जी का स्वागत व आभार व्यक्ति किया। और कहा कि इन बच्चों ने जो भक्ति भावना वाले गुण रखें है इससे प्रतित होता है की ये बच्चे आने वाले समाज की सुन्दर नीव रखेगें।