चंडीगढ़ (कमलेश भारतीय) - थियेटर एज के संचालक व प्रसिद्ध रंगकर्मी जुल्फिकार खान से मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है, जब थियेटर एज की स्थापना भी नहीं की थी। जुल्फिकार को इन्हीं दिनों पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने चंडीगढ़ प्राइड पुरस्कार दिया है यों इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन गणतंत्र दिवस पर सम्मान, बलराज साहनी पुरस्कार, ट्रू हीरोज पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं। मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले जुल्फिकार सन् 1989 में पंजाब विश्वविद्यालय से इंडियन थियेटर से एम. ए. करने आये और इसी दौरान श्रमिक बस्तियों के बच्चों के साथ राजा और किसान नाटक तैयार किया। थियेटर विभाग के डॉ. महेंद्र कुमार ने ही थियेटर ऐज नामकरण किया।
श्रमिक बस्तियों के पच्चीस बच्चों से शुरू किये इस पुनीत कार्य ने कब जुल्फिकार को ड्रीम होम के सपने तक पहुंचा दिया, स्वयं जुल्फिकार को भी पता नहीं चला। अब तक थियेटर एज के माध्यम से श्रमिक बस्तियों के अढ़ाई से लेकर तीन हजार तक बच्चों को कला से जोडऩे व एक प्रकार से जीने का सहारा बने जुल्फिकार मुम्बई में मन नहीं लगा पाए और कहते हैं कि एक तरह से अच्छा ही हुआ, यदि में वहां सफल हो जाता तो इन बच्चों के लिए काम कौन करता?
सन् 2000 में जुल्फिकार के श्रमिक बस्तियों के बच्चों के लिए काम करते देख चंडीगढ़ की तत्कालीन प्रशासक की सलाहकार नीरू नंदा व राज्यपाल महामहिम जैकब ने सेक्टर 24 के राजकीय उच्च विद्यालय में चार कमरे दे दिये। इसमें जुल्फिकार इन बच्चों के खान-पान से लेकर शिक्षा और कला से जोडऩे का अभियान चलाये हुए हें। इन दिनों 51 बच्चे थियेटर ऐज के इस कला स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और वे इनके लिए कम से कम सौ रुपये तक एकत्रित करने में संकोच नहीं करते।
जुल्फिकार का कहना है कि जब पहली बार इन बच्चों को लेने श्रमिक बस्ती में गया था तब माता-पिता व अभिभवकों का कहना था कि हमारे बच्चों को खराब कर रहे हो लेकिन अब स्वयं मेरे पास श्रमिक बस्ती के लोग अपने बच्चों को लेकर आते हें। यही कारण है कि इनके प्रति समर्पित हूं और चाहता हूं कि इन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवा सकूं, जोकि ड्रीम होम से ही संभव होंगी। इस सपने को आप सबके साथ पूरा करूंगा, एक न एक दिन।