चण्डीगढ - सर्वव्यापी परमात्मा की जानकारी से इन्सान की बुद्धि में ऐसा अनूठा व अलौकिक अनुभव होता है जो उसे पहले कभी भी प्राप्त नहीं हुआ होता । परमात्मा के इस अनुभव से ही मनुष्य की बुद्धि और मन में सुधार आता है क्योंकि इस अलौकिक अनुभव से इन्सान की बुद्धि में ऐसी हलचल पैदा होती है जिससे वह परमात्मा को वास्तव में ही सर्वशक्तिमान मानने लग जाता है और भविष्य के लिए वह अपने आपको पूर्णरूप से बदलने के लिए तैयार हो जाता है, ये उद्गार आज यहां सैक्टर 30-ए में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में इंगलिश मीडियम सन्त समागम में हज़ारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नरंजन सिंह, रिटायर्ड आई0ए0एस0 ने व्यक्त किए ।
सिंह ने आगे कहा कि जब इन्सान की बुद्धि परमात्मा को अच्छी तरह से जान लेती है तो फिर सत्संग करने व धार्मिक ग्रन्थों के अध्ययन से इन्सान का मन परमात्मा की सर्वोच्चता को स्वीकार करने लग जाता है और फिर अन्य इन्द्रियों तक भी यह जानकारी जाती है और फिर सभी इन्द्रियां मन के अनुसार कर्म करना आरम्भ कर देती हैं । इस बारे में उदाहरण देते हुए सिंह ने कहा कि परमात्मा की जानकारी से पूर्व इन्सान की आखें केवल पदार्थ को देखती थी लेकिन अब आंखें पहले परमात्मा को देखती हैं फिर पदार्थ को। इसी तरह से शरीर के सभी अंग और इंन्द्रियां पदार्थ को छोड़ कर परमात्मा की सत्ता से जुड़ जाते हैं। जीव पूर्णरूप से निराकार में इस तरह से समायोजित हो जाता है और इससे जुड़ जाता है जिससे इसकी पदार्थ से आसक्ति धीरे-धीरे कम होती जाती है। यह परिक्रिया चलती रहती है और एक दिन ऐसी स्थिति आ जाती है कि इन्सान भौतिक पदार्थों को सिर्फ दैनिक उपयोग के लिए ही जरूरी समझता है। यह जानकारी वर्तमानयुग में केवल निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज द्वारा ही कराई जा रही है ।