चंडीगढ़ - आर्य समाज सेक्टर 19 चंडीगढ़ में चंडीगढ़, पंचकूला, और मोहाली की सभी आर्य समाजों तथा डी ए वी शिक्षण संस्थाओं की और राम नवमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ यज्ञ, पूर्णाहुति और आशीर्वाद से हुआ। वैदिक प्रवक्ता नरेंद्र आहूजा ने कहा कि आर्य समाज राम की मानता है। उन्होंने कहा कि जिस राम रहते थे उसी विधि हमें भी रहना चाहिए। हमें राम चन्द्र के आदर्श मूल्यों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। आज उनके मर्यादित चरित्र पर चलने की आवश्यकता है। स्वामी दयानंद ने कहा है कि पूजा का यौगिक अर्थ यथा योग्य सत्कार करना है। अर्थात जो जैसा है उसे वैसा मानना। श्री रामचंद्र जी वाल्यावस्था से दैनिक यज करते थे। यहाँ तक कि जगलों में जाकर ऋषियों द्वारा किये जा रहे हवन में बाधा पहुँचाने वाले राक्षसों से रक्षा की। उन्होंने कहा कि ज्ञान की अग्नि को ह्रदय में प्रदीप्त करने की जरूरत है। इससे जीवन में विस्तार होता है।
प्रत्येक स्थिति में सामान भाव रखने वाले श्रीराम किसी भी समय भाव से विचलित नहीं हुए। आज उनके चरित्र से सभी को शिक्षा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आठ चक्रों और नौ द्वारों से बना यह शरीर अयोध्या है। इसमें राम मंदिर की स्थापना करने के लिए कुलषित तथा संकुचित विचारों को हटाना चाहिए तभी राम जी के भव्य मंदिर का निर्माण हमारे ह्रदयों में हो सकता है।
होशंगाबाद से पधारे पंडित उमेश कुमार शास्त्री ने कहा कि विदेशों से लोग चरित्र की शिक्षा पाने के लिए भारत आते थे। राम राज्य में किसी भी तरह की समस्या नहीं थी।
इस कार्यक्रम में महर्षि दयानंद पब्लिक दरिया के विद्यार्थियों, भजनोपदेशक नरदेव आर्य और नम्रता सोनी ने अपने मधुर भजनों से उपस्थित जन- समूह को आत्मविभोर कर दिया। इस मौके पर अजय गुप्ता, अनिल कुमार त्यागी, अनिल भल्ला, विनोद कुमार, अशोक आर्य, रघुनाथराय आर्य, सुरेन्द्र भल्ला, रीता चावला,सुमन दुग्गल, विजय लक्ष्मी, आदि भी उपस्थित थे। इस मौके पर ऋषि लंगर का भी आयोजन किया गया।