चंडीगढ - श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के मन्दिर एवं बिश्नोई भवन, सैक्टर-15, पंचकूला का 9वां स्थापना दिवस आज धूमधाम से मनाया गया। गत रात्रि एक विशाल जागरण का आयोजन किया गया और प्रात: 7.00 बजे से 11.00 बजे तक शब्दवाणी का पाठ किया गया। कलश पूजा के उपरान्त मन्त्रोच्चारित जल (पाहल) सभी श्रद्घालुओं एवं अतिथिगण ने ग्रहण किया और 15वीं शताब्दी में हुए गुरु जम्भेश्वर महाराज के 29 नियमों पर चलने के संकल्प को दोहराया। आठ साल पूर्व आज ही के दिन 2006 में हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमन्त्री एवं तत्कालीन हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष बिश्नोई रत्न चौधरी भजनलाल की अध्यक्ष्ता में तत्कालीन उपमुख्यमन्त्री, हरियाणा सरकार चन्द्रमोहन के करकमलों द्वारा इस विशाल श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के मन्दिर एवं बिश्नोई भवन, सैक्टर-15, पंचकूला का शिलान्यास किया गया था। उस समय भी इसी प्रकार का विशाल जागरण, हवन-यज्ञ और पाहल का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य-प्रदेश, उतरांचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ सहित पूरे हिन्दुस्तान भर से समस्त बिश्नोई समाज एवं श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान में आस्था रखने वाले पर्यावरण प्रेमी बन्धुगण पधारे थे।
यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय बिश्नोई समाज के मीडिया सलाहकार अरुण जौहर ने बताया कि रात्रि जागरण में बिश्नोई मन्दिर, हरिद्वार के महन्त स्वामी राजेन्द्रानन्दजी महाराज ने 29 नियमों एवं शब्दवाणी पर विस्तृत प्रकाश डाला। स्वामी सचिदानन्दजी महाराज ने 5 साखियां और भजन सुनाकर श्रद्घालुओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया। इन महात्माओं ने कहा कि आज के युग में भी गुरु जम्भेश्वर भगवान की 529 वर्ष पूर्व की शब्दवाणी और 29 नियमों का महत्व पूर्णरूप से प्रासंगिक है।
रात्रि जागरण के दौरान ही कुछ प्रतिभाशाली युवाओं को समाज सेवा, शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने पर बिश्नोई सभा, पंचकूला द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।