चंडीगढ़- हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. कृष्ण कुमार खंडेलवाल ने हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष व कथाकार कमलेश भारतीय के नवीनतम लघुकथा-संग्रह इतनी सी बात का विमोचन किया। उन्होंने इस अवसर पर मौजूद साहित्यकारों को संबोधित करते कहा कि कमलेश भारतीय देश के चर्चित लघुकथाकारों में शामिल हैं। इनकी लघुकथाएं आम व खास आदमी के चेहरों से परदे उठा कर उन्हें बेनकाब करने में सफल हैं, फिर चाहे वह उनका अपना ही चेहरा क्यों न हो। गुनहगार, लेखक और पुरस्कार, तंत्र और आदमी लघुकथाओं में स्वयं अपना ही चेहरा उजागर किया है। इसके अतिरिक्त आज साहित्य से प्रेम की धारा सूखती चली गई है, जिसे ऐसे थे तुम, सर्वोत्तम चाय, कायर, मैं नहीं जानता, मैं तुम्हें प्यार नहीं करती, पेड़ और पक्षी ऐसी लघुकथाएं हैं, जिनमें प्रेम का ऐसा मोहपाश है, जिसमें पाठक सहज ही बंध जाता है। राजनीति से पत्रकार का रिश्ता सब जानते हैं और लगभग जीन दशक तक पत्रकारिता करने वाले कमलेश भारतीय की लघुकथाओं में राजनीति का चेहरा न हो, यह हो नहीं सकता था। राजनीति, दौड़, राजनीति के कान, राजा विक्रमादित्य, हुजूर दरबार आदि रचनाएं राजनीति के पतन को सामने लाती हैं। कमलेश भारतीय के इस संग्रह में सौ लघुकथाएं हैं यानी एक रचनाकार ने शतक लगाया है और इसमें सामाजिक विसंगतियां पर भी रचनाएं हैं। कमलेश भारतीय पहले ग्राम्य जीवन से, बाद में शिक्षण से और फिर पत्रकारिता से जुड़े रहे। इस तरह विविध रंग दिखाई देते हें। इन इंद्रधनुषी लघुकथाओं को पाठक पसंद करेंगे। इससे पहले कमलेश भारतीय के मस्तराम जि़ंदाबाद, इस बार व ऐसे थे तुम लघुकथा-संग्रह प्रकाशित व चर्चित हो चुके हें। इतनी सी बात चतुर्थ लघुकथा-संग्रह है। पैपरबैक में पुस्तक व इसका आवरण लुभने वाला है। कमलेश का आम पाठक तक पहुंचने का प्रयास सराहनीय है क्योंकि कम मूल्य पर पुसतक उपलब्ध करवाते हैं।