चण्डीगढ़ - देश में बच्चों द्वारा अब तक कल्चरल हैरिटेज पर 900 फिल्में तैयार की जा चुकी हैं। यह जानकारी आज चण्डीगढ़ के सैक्टर 26 के सेंट कबीर पब्लिक स्कूल में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फोर आर्ट एण्ड कल्चरल हैरिटेज (इंटैक) के तत्वावधान में इंटैक चण्डीगढ़ चैप्टर द्वारा आयोजित ‘फिल्म इट’ नामक एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर दी गई।
इस असवर पर मुख्य अतिथि पंजाब पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती गीतिका काला ने कहा कि अध्यापक यानि गुरू ही बच्चों का जीवन है, बिना अध्यापक (गुरू) के ज्ञान नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज के युग में बच्चों को सीखने के लिए इंटरनेट से लेकर यू-टयूब तथा अन्य सरल साधन हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी पहले थियेटर का जमाना था तब कैसे साउंड आती है, कोस्टयूम कैसे प्रयोग किए जाते हैं, अन्य तकनीकी चीजों के इस्तेमाल के बारे में पूरा समझाया जाता है, तब जाकर किसी फिल्म बनने के बारे में पता चलता था, जो एक पूर्ण शिक्षा थी। उन्होंने कहा कि आज तो फिल्म बनाने के लिए कम्प्यूटर तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
उन्होंने कहा कि कल्चरल हैरिटेज की दिशा में यह एक सहरानीय कदम है और काफी रोमांचक भी है। उन्होंने उपस्थित बच्चों से कहा कि इस कार्यक्रम फिल्म इट के तहत आप साउंड, एक्टिंग और खुद की कास्ट कार्यक्रम होगा, इसके अलावा एडिटिंग भी खुद की ही होगी, जोकि काफी रोमांचित करने वाली होगी।
इस अवसर पर इनटैक चण्डीगढ़ चैप्टर के संयोजक श्री विरेन्द्र के कपूर ने कहा कि चण्डीगढ़ एक अच्छा शहर है और यहां के बच्चे भी काफी अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि इस उज्ज्वल शहर में बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि हमने यहां पर बच्चों के लिए पहले भी विभिन्न प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की हैं।
इनटैक की परियोजना निदेशक श्रीमती पूर्णिमा दत्त ने कहा कि इनटैक एक स्वैच्छिक संस्था है जो कल्चरल हैरिटेज में कार्य कर रही बड़ी संस्थाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि चण्डीगढ़ के बच्चे काफी अच्छे हैं। देश के सीबीएसई के 3000 स्कूल हैरिटेज क्लब से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म इट मल्टीकल्चरल परियोजना है, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ उनके द्वारा तैयार की गई फिल्मों व अनुभव को सांझा करना है। यह परियोजना हैमलीन ट्रस्ट और इनटैक के सहयोग से चलाई जा रही है। चंडीगढ़ देश का सातवां शहर है, जहां पर इस परियोजना के तहत यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, गोआ, मुम्बई और कोलकता में इस परियोजना के तहत ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत कार्यशाला में बच्चों को पुराने भवनों, समारकों आदि के बारे में फिल्म बनाने के लिए समझाया जाता है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन, यूके से इस परियोजना के अन्तर्गत कार्यशाला में बच्चों को तकनीकी सहायता देने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ श्री वैस जैफरसेन देंगे। उन्होंने बताया कि हमारे देश में बहुत विविधता है और विविधता के कारण यहां कल्चरल हैरिटेज काफी स्कोप है।