चंडीगढ़ : आरके विक्रमा शर्मा - शहरों में पुराणी मान्यताओं व् परम्पराओं की बेड़ियों से निकल कर समाज को नई सेंध देने की दिशा में आज पढ़े लिखों के शहर में डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन आफिसर (सेवानिवृत) और शहर की गठित पहली नगर निगम में मनोनीत पार्षद प्रसन्न कौर के देहावसान के बाद उनकी पार्थिव देह को उनकी बेटी प्रिंसिपल विक्रमजीत कौर की बेटी ने मुखाग्नि दी । शिक्षा जगत में जानीमानी हस्ताक्षर और तेज तरारा अफसर प्रसन्न कौर का सेक्टर 25 स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रसन्न कौर की बेटी विक्रमजीत कौर के मुताबिक उनकी माँ का जन्म 10 अक्तूबर 1925 को शिक्षा को जीवन की बुनियादी व् अनिवार्य जरूरत समझने वाले परिवार में हुआ था । पूर्व डीइओ प्रसन्न कौर के अंतिम संस्कार में बुद्धिजीवी , शिक्षा क्षेत्र व् मीडिया से जुडी हस्तियों ने भाग लिया। कन्या भ्रूण हत्या की खिलाफत और कन्याओं के जन्म पर ख़ुशी मनाने वाली प्रसन्न कौर ने हमेशा बेटियों को महत्व देने की प्रेरणा दी। प्रसन्न कौर शहर की अनेकों बड़ी मैनेजमेटों और धार्मिक सस्थाओं और गुरुद्वारों सहित केन्द्रीय विद्यालय और सरकारी कमेटियों आदि की मानद और मनोनीत पदाधिकारी रहीं । पर्यावरण प्रेमी और समाजसेविका प्रसन्न कौर ने शहर के गाँव में गुरुद्वारा हेतु भूमि दान दी । गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह करवाने की चलन उक्त गुरुद्वारा में शुरू करवाई । वो लडकियों को हमेशा अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार का जीवनयापन करने के लिए प्रोत्साहित करती रहीं । इसी के चलते उनकी पार्थिव देह को उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक उनकी दोहती (नवासी) बुशरा एसपी सिंह ने मुखाग्नि दी। इस गरिमामय रस्म को देख सब की आँखों में आश्रु धारा के साथ बेटियों के प्रति असीम स्नेह और उनके जीवन की बहुमूल्य अहमियत का अहसास देखा गया । प्रसन्न कौर अपने पीछे बेटी विक्रमजीत कौर (प्रिंसिपल ) और दो दोहती इक दोहता का हरा भरा परिवार छोड़ कर रुखसत हुईं । प्रसन्न कौर का दामाद सुरिन्दर पाल सिंह हाल ही में बतौर आई ऍफ़ एस रिटायर्ड हुए हैं ! प्रसन्न कौर के मार्गदर्शन और सटीक अध्यापन में पढ़े हुए आज अनेकों उच्च पदों पर अधिकारी आसीन हैं । जो आज विभिन्न पदों पर नियुक्त होकर देश, समाज और मानवता की सेवा कर रहे हैं । प्रसन्न कौर की आत्मिक शान्ति के नामित रखे गये सहज पाठ का भोग 25 अगस्त को उनके निवास स्थान सेक्टर 40 सी में पड़ेगा ।