चंडीगढ़ - यूटी गेस्ट हाउस में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने लेखक और चिंतक निदा फाजली के साथ रविवार की शाम सजाई। फाजली को सुनने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भले ही बाजारवाद के इस दौर में लफ्जों की कद्र कम हो, लेकिन तहजीब और कल्चर हमेशा जिंदा रहते हैं। दुनिया में सिर्फ हिंदी और उर्दू ऐसी जुबानें हैं जो एक साथ बोली जाती हैं। फाजली ने यहां पर शेरो-शायरी, दोहों और कविताओं से ऐसा समां बांधा कि चंडीगढ़ के श्रोता इस शाम को कई दिनों तक भूल नहीं पाएंगे।
'दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है'
-फाजली