नई दिल्ली : इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में 21 से 26 जुलाई तक चित्रकार पुनीता रंजन की सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन ‘स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट’ आयोजित होगी। सप्ताह भर चलने वाली इस प्रदर्शनी में दर्शकों को पुनीता रंजन द्वारा विभिन्न विषयों पर बनाई गई पेंटिंग्स देखने को मिलेंगी।
अपनी कला के बारे में पुनीता रंजन ने बताया, ‘नियमों में बंधने की बजाय मैं वही चित्रित करती हूं, जो मुझे अच्छा लगता है। मैंने पेंटिंग बनाने का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। मेरा मानना है कि कला को सीखा या सिखाया नहीं जा सकता। यह व्यक्ति की अपनी प्रतिभा होती है, जिसे बस पहचानने की जरूरत होती है।’
उन्होंने बताया कि हम जो महसूस करते हैं वही कला है। कला कैनवस पर कविता की तरह है। इसका कोई नियम या तकनीक नहीं है। यह कोई जटिल भाषा भी नहीं है, जिसे आम आदमी समझ न सके। मेरे लिए कला का मतलब है खुद की एवं अपने विचारों की अभिव्यक्ति। मेरी कला एक आम आदमी के लिए है। एक छोटे बच्चे के लिए है।
पुनीता ने आगे बताया, ‘मैं पेंटिंग बनाने के लिए हल्के रंग, पानी वाले रंग, तैलीय रंग, तेजाब से बने रासायनिक पदार्थों, कोलाज, पेंसिल्स व मिले-जुले माध्यमों का प्रयोग करती हूं। मैंने कम उम्र में ही पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया था। जब मैं नौंवी कक्षा में थी, तब मेरी पहली सोलो पेंटिंग प्रदर्शनी लगी थी। मैंने चार्टर्ड अकांउटेंसी को कैरियर के रूप में चुना, लेकिन पेंटिंग करने की अपनी दिली इच्छा को भी जारी रखने का फैसला किया।
पुनीता रंजन के काम को इलाहाबाद संग्रहालय (अभिरुचि- एग्जीबिशन ऑफ आर्टिस्ट्स ऑफ सेंट्रल इंडिया 2002-03) से मान्यता प्राप्त है। उन्हें स्टेट लेवल पेंटिंग एग्जीबिशन, पटना में एक्सीलेंस अवार्ड मिला। इनकी बनायी पेंटिंग्स नई दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना, पुणे, मुंबई, बंगलौर से लेकर सिएटल, शिकागो (अमरीका), लंदन, दुबई (यूएई) और सिंगापुर तक में मौजूद हैं। वे पूरे भारत में 1992 से अब तक, 8 सोलो एवं 3 समूह प्रदर्शनियां लगा चुकी हैं।