चंडीगढ़ - बाल्य अवस्था में बच्चे के बौद्धिक के साथ-साथ शारीरिक विकास के लिए बेहतर प्रयास किया जायें तो किशोरावस्था तक उसके व्यक्तित्व विकास में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो पाती। गैर सरकारी संगठन ‘सुनहरा आज’ ने बच्चों के विकास एवं शिक्षा को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सभी के लिए शिक्षा के अवसर प्रॉजेक्ट के तहत एक कदम उठाया है। इस पहल में संगठन का मकसद आंगनबाडिय़ों को और कुशल बनाना है। जो बच्चे की शिक्षा और उसके संपूर्ण विकास की पहली सीढ़ी होती है।
बुधवार को सुनहरा आज संगठन ने चंडीगढ़ मौलीजागरां के आसपास की 24 आंगनबाडिय़ों को अपनाते हुए उन युवा सदस्यों के लिए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 32 वर्षों से शिक्ष जगत में अपना अनुभव देते आ रहे डीसीएम ग्रुप के निदेशक बीबी गुप्ता ने आंगनबाड़ी प्रशिक्षु सदस्यों की प्रतिभा को और निखारने के लिए कार्यशाला आयोजित की। श्री गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि अध्यापक का व्यवहार और विशेषज्ञता ही बच्चों के विकास में मददगार साबित हो सकती है। खरड़ ईएसआई के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. प्रेम प्रीत घुम्मन ने सदस्यों को अभिभावक एवं सामूहिक सहभागिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे के विकास में सबसे पहले उसके अभिभावक तथा बाद में समाज के बुद्धिजीवि ही अपनी भूमिका निभाते हैं। समाज में पहला कदम रखने के बाद बच्चा खुद को सुरक्षित, बौद्धिक स्तर पर सुदृढ़ तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ समझे तो अभिभावक व बुद्धिजीवि वर्ग की मेहनत सफल हो जाती है। सुनहेरा आज संगठन की अध्यक्षा सुरलीन कौर ने इस बात पर बल दिया कि बच्चे को उसका दर्जा मिलना चाहिए यद्यपि बच्चा जागरूकता और प्रसन्नता के साथ अपनी मांग रखे। उन्होंने कहा कि 2 से 4 वर्ष की आयु में बच्चा तेजी के साथ सीखता है। यही समय है जब प्री-स्कूल लर्निंग उसके बौद्धिक एवं शारीरिक विकास में मददगार साबित हो सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान मोल्डशेप ग्रुप के संस्थापक सतीश शर्मा ने भी बच्चों के विकास एवं उनकी शिक्षा पर समाज के हर वर्ग को संयुक्त रूप से प्रयास करने का आह्वान किया।