Hindi English Saturday, 17 October 2026
BREAKING
• 70 फुट ऊंचे रावण और भव्य आतिशबाजी के साथ मनेगा सेक्टर 49 में दशहरा • चंडीगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन नंदोत्सव और तृतीय वृंदावन प्राकट्य उत्सव बड़े उत्साह से मनाया गया; भक्ति मंत्रों से गूंजा पंडाल • सी.आर.बी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-7 का वार्षिकोत्सव ‘झंकार’ बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ आयोजित • एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना • दो दिवसीय नि:शुल्क एक्यूपंक्चर एवं मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आगाज़ • श्रीराम के आदर्श हमारे आचरण और सामाजिक जीवन का हिस्सा बनें : नरेश अरोड़ा • चंडीगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ, इंद्रेश महाराज के प्रवचनों और भजनों से कृष्णमय हुआ शहर • फोर्टिस मोहाली ने आधुनिक इमेजिंग, फ्लोरेसेंस-गाइडेड सर्जरी और रोबोटिक प्रक्रियाओं से स्तन कैंसर के इलाज को आगे बढ़ाया • श्रीमद्भागवत कथा एवं तृतीय वृंदावन प्राकट्य उत्सव का भव्य आयोजन आज से • भरत-कैकेयी संवाद ने दर्शकों को किया इमोशनल

चंडीगढ़

More News

भक्त और भगवान के बीच में है सद्‌गुरु -चित्र विचित्र महाराज

Updated on Sunday, February 16, 2025 17:30 PM IST

भक्त और भगवान के बीच में है सद्‌गुरु -चित्र विचित्र महाराज 

चंडीगढ़ - ओम महादेव कावड सेवादल द्वारा करवाई जा रही पांचवीं शिव महापुराण कथा का आज पहला दिन था कथा में भक्त और भगवान के बीच में कौन है इस बारे में बताया गया भगत कहते हैं कि हम भगवान के आश्रित है और सच भी यही है हम सब के पास और कोई दूसरा आसरा सहारा है भी तो नहीं । होंगे जिनके पास कोई और विकल्प हो लेकिन प्रेमी भक्तों के पास तो एकमात्र विकल्प उसके नाम और सहारे का है और उस आसरे सहारे का नाम है बांके बिहारी।

मैं रिजु तो गोपाल सो खिचु तो गोपाल सो प्रेम भी उन्हीं से करना है और प्रेम के अधिकार का उपयोग करते हुए लड़ना भी उन्हीं से है कोई और बीच में ही नहीं भक्त और भगवान के बीच में कौन है अगर कोई है तो केवल मात्र एक सद्‌गुरु ही है जो भगत और भगवान का मिलन करवाते है

भगवान कहते हैं । मैं भगतन का दास भक्त मेरे मुकुटमणी।

जब नाभाजी ने जो भक्त माल के रचनाकार हैं जब नाभा जी ने भक्तमाल ग्रन्थ को रचा और निकुंज में श्री नाभा जी नाभा सखी के रूप मे पुष्पों की माला को लेकर जो ऐसी पंचरगी इतने सुंदर सुंदर पुष्प उसमें गुथे हुए और युगल प्रियल लाल दोनों रत्न सिंहासन पर विराजित हैं और ये सखी सुंदर पुष्पों की माला को लेकर युगल के सन्निकट पहुँची तो दोनो की मति ललचाई लाल जी कहते हैं अरी नाभा सखी शीघ्र अति शीघ्र यह माला मेरे कंठ में धारण करा दे ।

उधर किशोरी जी कहती है अरी नाभा सखी इनकी मत सुनो शीघ्र अतिशीघ्र इस माला को मेरे कंठ में पहनाओ लाल जी कहते हैं पहले मैने कहा इस माला को मेरे कंठ में पहनाओ ।

किशोरी जी कहती है तू सखी है और हम सब सखियों की स्वामिनी है इसलिए तुम्हारा धर्म बनता है अपनी स्वामिनी की आज्ञा का पालन करते हुए यह माला मेरे कंठ में पहनाओ नाभा सखी भी एक बार तो आश्चर्य में पड़ गई करूँ तो करूँ क्या 

क्या दोनो आपस में प्रेम कलह कर बैठे दोनों चाहते हैं ये भक्तमाल रुपी सुन्दर माला मेरे कंठ में आये । सखी भी चतुर होती है सखी ने भी चतुराई दिखाई और दोनों से ही एक ही प्रश्न किया कि ये प्रिय प्रीतम हम माला जरुर पहनाएँगे ।

लेकिन पहले मेरी एक संशय का समाधान तो कीजिए ना दोनो ने कहा तुम्हारी क्या संशय हमारे समक्ष रखो हम निश्चित ही तुम्हारी समस्या का समाधान करेंगे तब श्री नाभा सखी ने कहा हे प्रिय लाल हे किशोरी जी पहले तो आप हमको यह बताइए कि आप दो हो या एक हो दोनों युगल ने एक दूसरे की ओर निहारा और बनो मुस्कराये और समझ गए राखी ने बड़ी चतुराई के साथ इस समस्या का समाधान कर दिया दोनों युगल एक साथ बोले अरी सखी हम दो नही हम तो एक प्राण दो देह है वस्तुतः तो हम एक ही हैं ।

कनक बेल श्री राधिका मोहन श्याम तमाये।

हम दोनों एक ही हैं । ये तो लीला सूख के लिए हम दो रूप में प्रकट हैं अथवा तो हम दोनों के प्राण एक ही है । तब नाभा सखी ने कहा अगर आप दोनों एक ही है तो फिर ये प्रेम कलह किस बात का फिर ये प्रेम युद्ध किस बात का कि पहले ये माला हमें पहनाओ पहले हमें पहनाओ ।

तब लाल जी कहते हैं इनमें हमारे भक्त हैं इसलिए इस माला के अधिकारी हम है। प्रिय जी कहती है की आप हमारी स्वामिनी है इसलिए तुम्हारा धर्म बनता है यह मामला हमें पहनाओ जब आप दोनों एक ही है तो अलग अलग माला का प्रश्न कहाँ उठता है कहते हैं नाभा सखीने दोनों को निकट बैठाया और दोनों के कंठ में ये भक्तों के पुष्पों की माला एक सगं पहना दी ।

माला आयी ह्रदय तक लेकिन जैसे ही ये भक्तमाल रूपी माला युगल के कंठ में आयी और ह्रदय तक पहुँची तब माला बढ़कर युगल के चरणों तक पहुँच गई इसका भाव क्या है ठाकुर जी कहते है मेरे भगत मेरे हृदय के अधिकारी हैं लेकिन भगत कहते हैं ठाकुर जी मैं आपके ह्रदय का नहीं आपके चरणों का अधिकारी हूँ मैं आपके चरणों में रहना चाहता हूँ लेकिन ठाकुर जीकहते है मेरे भक्त मेरे ह्रदय में सदा सदा के लिए रहते हैं।

Have something to say? Post your comment
70 फुट ऊंचे रावण और भव्य आतिशबाजी के साथ मनेगा सेक्टर 49 में दशहरा

: 70 फुट ऊंचे रावण और भव्य आतिशबाजी के साथ मनेगा सेक्टर 49 में दशहरा

सी.आर.बी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-7 का वार्षिकोत्सव ‘झंकार’ बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ आयोजित

: सी.आर.बी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-7 का वार्षिकोत्सव ‘झंकार’ बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ आयोजित

एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना

: एमएसएमई क्षेत्र के लिए सुरक्षित भविष्य है नेशनल पेंशन सिस्टम योजना

दो दिवसीय नि:शुल्क एक्यूपंक्चर एवं मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आगाज़

: दो दिवसीय नि:शुल्क एक्यूपंक्चर एवं मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आगाज़

भरत-कैकेयी संवाद ने दर्शकों को किया इमोशनल

: भरत-कैकेयी संवाद ने दर्शकों को किया इमोशनल

शहर में पहली बार: भव्य 'टाइटैनिक शिप कार्निवाल' का आयोजन

: शहर में पहली बार: भव्य 'टाइटैनिक शिप कार्निवाल' का आयोजन

श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ के वार्षिक समारोह की तैयारियां शुरू, मंदिर कमेटियों को दिए जा रहे निमंत्रण

: श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ के वार्षिक समारोह की तैयारियां शुरू, मंदिर कमेटियों को दिए जा रहे निमंत्रण

गीतांजलि अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया भारत का मान

: गीतांजलि अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया भारत का मान

श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति से लेकर प्रभु श्रीराम के जन्म तक की लीलाओं ने दर्शकों को किया भावविभोर

: श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति से लेकर प्रभु श्रीराम के जन्म तक की लीलाओं ने दर्शकों को किया भावविभोर

ऑल पंजाब क्रशर एसोसिएशन ने उठाए उद्योग की समस्याओं के मुद्दे, सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग

: ऑल पंजाब क्रशर एसोसिएशन ने उठाए उद्योग की समस्याओं के मुद्दे, सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग

X