“एआई में इमोशनल इंटेलिजेंस और सच्ची रचनात्मकता की कमी है,” कौलअमनिस्ट अफ्फान येसवी ने ‘एआई एंड क्रिएिटविटी: फ्रैंड ऑर फोई?’ सेशन में विचार व्यक्त करते हुए कहा
चंडीगढ़, 24 नवंबर, 2024: चंडीगढ़ लिट फेस्ट (सीएलएफ) - लिटराटी 2024 का 12वां एडीशन, साहित्य, कला, रचनात्मकता और इंटेलिजेंस का एक वाइब्रेंट उत्सव, रविवार को चंडीगढ़ के सुखना लेक क्लब में संपन्न हुआ। इस लिट फेस्ट में ‘सिटी ब्यूटीफुल’ को ‘लिटरेरी टूरिज्म’ के एक प्रमुख हब में बदलने का वादा किया गया।
सुखना लेक के खूबसूरत बैकग्राउंड में, इस फेस्टिवल का आयोजन चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी (सीएलएस) द्वारा किया गया था, जिसमें कई जाने-माने लेखकों और वक्ताओं ने दो दिनों में कई महत्वपूर्ण और दिलचस्प सेशंस के साथ कुल 18 सत्रों में भाग लिया।
सीएलएफ लिटरेटी की फेस्टिवल डायरेक्टर और सीएलएस की चेयरपर्सन डॉ. सुमिता मिश्रा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "मैं इस लिटरेरी फेस्टिवल को एक शानदार सफलता बनाने के लिए सभी साहित्य प्रेमियों को धन्यवाद देती हूं। सीएलएफ लिटराटी 2025 के लिए, हम लेखकों और स्पीकर्स की और भी अधिक वाइब्रेंट और रोमांचक लाइनअप के साथ लौटने का वादा करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि 13वां एडीशन क्रिएटिविटी और इंटेलिजेंस का एक अविस्मरणीय उत्सव बन जाए। हम सभी साथ मिलकर हम 'सिटी ब्यूटीफुल' को 'लिटरेरी टूरिज्म हब' बनाएंगे।
दिन 2 - लिट फेस्ट में साहित्यिक गतिविधियों के समापन दिवस की शुरुआत डॉ. सुरजीत पातर को भावभीनी श्रद्धांजलि 'इन मेमोरियम: लफ़्ज़ा दी दरगाह' के साथ हुई। सेशन के दौरान कवि एमी सिंह और पंजाबी लेखक जस्सी संघा ने उनके साहित्यक रचनाओं पर चर्चा की और बताया कि कैसे उनकी सरल लेकिन गहन कविताएं मानवीय अनुभव के सार को खूबसूरती से पकड़ती हैं। उन्होंने एक उदाहरण भी सुनाया, जब पातर दक्षिण अफ्रीका में एक कविता सम्मेलन में शामिल हुए थे, तो डर था कि बारिश के कारण कोई भी उन्हें सुनने नहीं आएगा, हालांकि बारिश के बावजूद, बड़ी संख्या में दर्शक एकत्र हुए और उनकी काव्य रचनाओं की सराहना की।
एक अन्य इंटेलेक्चुएली रूप से बेहद रोमांचक सेशन, "हिस्टरी एज स्टोरीटेलिंग: रिवाइविंग द लॉस्ट चैप्टर्स" में लेखिका इरा मुखोटी ने अपनी पुस्तक 'द लायन एंड लिली' की गहन जानकारी साझा की, जो हिंदुस्तान के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक अवध के अशांत 18वीं सदी के उदय की पड़ताल करती है। मुगल शासन के बावजूद, अवध सआदत खान और उनके उत्तराधिकारियों के अधीन फला-फूला, जिन्होंने साहस और कूटनीति के साथ नेतृत्व किया। हालांकि, बक्सर की लड़ाई में अंग्रेजों की जीत के बाद, अवध की शक्ति कमजोर हो गई क्योंकि उसे अंग्रेजों के साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने कहा, “द लायन एंड लिली शीर्षक भारतीय गुट (शेर) और फ्रांस (लिली) का प्रतीक है, जो उस समय की जटिल गतिशीलता को दर्शाता है।”
इसके बाद, “ब्यूटी इन डायवर्सिटी: लव, लैंग्वुएज एंड पोएट्री" कई पुरस्कार विजेता अनुवादक रख्शंदा जलील ने उर्दू के आकर्षण का बखूबी जश्न मनाया। उन्होंने उर्दू को एक ऐसी भाषा के रूप में वर्णित किया जो “गागर में सागर भरने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि मुझे इसमें संतोष और शक्ति मिली।”
सीनियर ब्यूरोक्रेट और लेखक विजय वर्धन ने अपनी पुस्तक ‘कुरुक्षेत्र: टाइमलेस सैंक्टिटी’ पर चर्चा की, जो कुरुक्षेत्र को भारतीय आध्यात्मिकता और रहस्यवाद के प्रतीक के रूप में खोजती है। उन्होंने कहा कि "हिंदू धर्म और महाभारत से गहराई से जुड़ा होने के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विभिन्न धर्मों का संगम स्थल भी था, जिनमें कई कहानियों में बौद्ध धर्म और सूफीवाद भी शामिल हैं।"
एक अन्य सत्र ‘साहित्य संवाद: कथा और कल्पना’ में राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक और प्रसिद्ध कवि जितेंद्र श्रीवास्तव ने संचालक शायदा के साथ ‘कल्पना और यथार्थ’ के बीच के अंर्तसंबंध पर गहन चर्चा की। कौशिक ने कहा कि “कल्पना यथार्थ में बदल जाती है। इसके बिना हम यथार्थ के सार तक नहीं पहुंच सकते।”
संचालक ने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि कल्पना ही रचनात्मकता का मूल है, उन्होंने कहा कि “मैंने कविता लिखी नहीं है, मुझे कविता निहाल हुई है” । जितेंद्र ने आगे बताया कि कवि और लेखक के लिए समाज एक प्रयोगशाला की तरह काम करता है और शब्दों में सच्ची अभिव्यक्ति के लिए पूरी तरह डूब जाना ज़रूरी है। दोनों वक्ताओं ने अपनी कविताओं के आकर्षक पाठ के साथ सत्र का समापन किया।
इस प्रेरक सत्र के बाद अनिरुद्ध तिवारी द्वारा लिखित ‘रिफ्लेक्शन्स ऑफ रामसेवक’, लेखिका चेतना कीर द्वारा लिखित ‘गीशा इन द गोटा पट्टी' और सारिका धूपर द्वारा लिखित ‘उद्गान’ पुस्तकों को रिलीज़ किया गया।
‘एआई एंड क्रिएिटविटी: फ्रैंड ऑर फोई?’, थीम पर एक गहन सेशन में प्रकाशक अफ्फान येसवी ने इस बात पर जोर दिया कि, “एआई में सच्ची रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता का अभाव है, जिसके लिए मानवीय संघर्ष और प्रयास की आवश्यकता होती है।” उन्होंने गूगल मैप्स जैसे उपकरणों से लेकर स्तन कैंसर आदि का पता लगाने तक दैनिक जीवन में एआई के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला।
लेखक खुशवंत सिंह ने एआई को एक पॉवरफुल टूल बताया और कहा कि इसमें पूरी की पूरी फिल्में बनाने, लेखन में सहायता करने, आइडिया जेनरेशन और बहुत सी चीजों की क्षमता है।
मंच कला पर एक आकर्षक सत्र, 'द पॉवर ऑफ नैरेटिव थिएटर एंड बियोंड' में पद्मश्री नीलम मानसिंह चौधरी ने रंगमंच के परिवर्तनकारी सार और मानवीय भावना पर इसके गहन प्रभाव को स्पष्ट रूप से चित्रित किया।
उन्होंने कहा, "चाहे वह पेंटिंग हो, साहित्य हो या सिनेमा- कला के रूपों में मानवीय कल्पना को उसके चरम पर ले जाने की शक्ति होती है। रंगमंच, विशेष रूप से, अपनी तात्कालिकता और आत्मीयता के लिए जाना जाता है, जो दर्शकों को एक साझा स्थान पर खींचता है जहां कहानियां जीवंत होती हैं और गहरी भावनात्मक और बौद्धिक स्तरों पर गूंजती हैं।"
एम.के. रैना, थिएटर निर्देशक और फिल्म निर्माता ने कहा कि रंगमंच वास्तव में कहानी कहने का एक तरीका है जो किसी को समुदाय से जोड़ता है। यह दर्शकों के साथ के साथ जुड़ने के लिए एक स्थान प्रदान करता है, जिससे उन्हें अपने स्वयं के दृष्टिकोण से व्याख्या और विचार करने की काबलियत मिलती है।
'इकोज ऑफ 1984: नैरेटिव्स ऑफ लॉस, सरवाइवल एंड आइडेंटिटी' शीर्षक वाले एक मार्मिक सत्र में, सनम सुतीरथ वज़ीर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों और 'द कौर्स ऑफ़ 1984' पुस्तक लिखने के अपने उद्देश्य पर विचार किया। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए लिखा गया था कि ऐसे मुश्किल और निराशा से गुज़रने वाली महिलाओं की आवाज़ कभी न भूली जाए। इन महिलाओं की कहानियां सिर्फ़ पीड़ा के बारे में नहीं हैं; वे ताकत, अस्तित्व और न्याय की निरंतर खोज के बारे में हैं।"
पुस्तक पर अपने विचार साझा करते हुए, एक अन्य वक्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुरस्कार विजेता कवि मनमोहन सिंह ने कहा कि यह पुस्तक दंगों से प्रभावित महिलाओं की कई अनकही कहानियों को उजागर करती है और उनके जिंदगी की जंग लड़ने की बहादुरी को दिखाती है। पुस्तक का उद्देश्य आम जनता तक पहुंचना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है।
आगे बढ़ते हुए, दर्शकों ने 'भारत की सभ्यतागत संपदा की खोज: भाषा, आध्यात्मिकता और विरासत' में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक ताने-बाने की एक अंतर्दृष्टिपूर्ण खोज में खुद को डुबो दिया, जिसमें लेखक और प्रकाशन गृह गरुड़ प्रकाशन के संस्थापक और सीईओ संक्रांत सानू और लेखक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिरुद्ध तिवारी ने भारत के प्राचीन ज्ञान और इसकी आधुनिक प्रासंगिकता के सार में गहराई से जाना।
उतार-चढ़ाव से भरे एक अन्य सेशन 'फियर एंड फॉली: द इंटरसेक्शन ऑफ हॉरर एंड सैटायर' में, फिल्म निर्माता सोहम शाह और भारत के पहले बॉय-बैंड - ए बैंड ऑफ बॉयज़ के संस्थापक करण ओबेरॉय ने समकालीन कथाओं में हॉरर और व्यंग्य के सुखद और अलग किस्म के मिश्रण की खोज की।
सोहम ने बॉलीवुड निर्देशक करण जौहर के साथ काम करने के अपने अनुभव और उस घटना को साझा किया जब उन्हें फिल्म 'काल' के लिए पार्क में शूटिंग की अनुमति लेने के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क की यात्रा करनी पड़ी थी जो कि एक पैरानॉर्मल थ्रिलर थी। उन्होंने अपनी नई किताब -ब्लड मून के बारे में भी बात की।
करण ओबेरॉय ने कहा कि वह अपनी स्क्रिप्ट में व्यंग्य का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उनके अनुसार व्यंग्य लोगों को विषय पर सोचने और विचार करने के लिए प्रेरित करता है। सत्र के बाद, करण ओबेरॉय ने मंच संभाला और अपने शानदार प्रदर्शन से कार्यक्रम स्थल पर धूम मचा दी। रिदम में डूबे लोग, थिरकाने वाले संगीत और अनूठे गीतों ने सभी को अपने झूमने पर मजबूर कर दिया।
दिन का समापन सीएलएफ-लिटरेटी 2024 के फेस्टिवल डायरेक्टर के समापन भाषण के साथ हुआ।