प्राचीन कला केंद्र कला के क्षेत्र में नित नए आयाम बना रहा है। पिछले 25 वर्षों से निरंतर कला और कलाकारों के प्रचार प्रसार हेतु कला और संगीत प्रेमियों के लिए विभिन्न कला रंगों से सजी प्रस्तुतियां पेश करता आ रहा है। नृत्य और संगीत से सजी इन प्रस्तुतियों द्वारा कला और कलाकारों का प्रचार करते हुए आज इस अद्भुत श्रृंखला की रजत जयंती मना रहा है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन आज युवा वाणी राव तथा सधे हुए सितार वादक सौमेन भट्टाचार्य ने अपनी खूबसूरत प्रस्तुतियों से दर्शकों को आनद की अनुभूति करवाई।
बहुआयामी प्रतिभा की धनि और सुरीली आवाज़ का संगम वाणी राव एक युवा गायिका हैं जिनका एक संगीतिक परिवार में हुआ और इन्होने बचपन से ही विधिवत रूप से अपने पिता जाने माने शास्त्रीय गायक पंडित दामोदर राव से संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। किराना और बनारस घराने की गायिकी का संगम लिए वाणी के गायन में शास्त्रीय राग और सुगम संगीत की सूंदर समावेश है। नित नए सफलता के आयाम बना रही वाणी बहुत से कार्यक्रमों में अपनी गायिकी की प्रतिभा से दर्शकों को सम्मोहित कर चुकी हैं।
आज के दूसरे कलाकार सौमेन भट्टाचार्य पंजाब यूनिवर्सिटी में संगीत विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इन्होने ने अपने पिता श्री सुधीर भट्टाचार्य से संगीत की शिक्षा प्राप्त की इसके उपरांत सितार वादन की शिक्षा पंडित मणिलाल नाग के जाने माने शिष्य पंडित सौमित्र लाहिरी से सितार वादन की गहन शिक्षा प्राप्त की। इसके अलावा पंडित दीपक चौधरी एवं पंडित शुभांकर बैनर्जी से भी सितार वादन की बारीकियां सीखी। बहुत से अवार्डों से सम्मानित सौमेन ने संगीत की दुनिया में एक अलग पहचान बनाई है।
आज के कार्यक्रम की शुरुआत वाणी राव के शास्त्रीय गायन से हुई। जिस में उन्होंने राग मधुवंती में पारम्परिक आलाप से शुरुआत की। इसके बाद विलम्बित एक ताल की रचना व्याकुल मन मेरो पेश करके दर्शकों को सहज ही अपने संगीत से जोड़ लिया। इसके उपरांत द्रुत तीन ताल में निबद्ध रचना जियरा लुभाये मन ललचाये पेश करके दर्शकों की खूब तालिया बटोरी। कार्यक्रम का समापन इन्होने देवी रागमाला से किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा क्योंकि अष्टमी के अवसर पर ऐसी रागमाला से दर्शक अभिभूत हो गए। इनके साथ तबले पर चंडीगढ़ के जाने माने तबला वादक श्री मेहमूद खान तथा हारमोनियम पर पंडित दामोदर राव ने बखूबी संगत की।
इस मधुर प्रस्तुति के बाद सौमेन भट्टाचार्य ने मंच संभाला और राग कौंसी कान्हरा में आलाप से सुन्दर शुरुआत की । । इसके बाद विलम्बित उपरांत विलम्बित गत में जोड़ पेश करके अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया । द्रुत गत में जो कि तीन ताल में निबद्ध थी पेश किया।सौमेन ने कार्यक्रम का समापन एक खूबसूरत धुन से किया। इनके साथ जाने माने तबला वादक सिद्धार्थ चैटर्जी ने बखूबी संगत की और कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए ।
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को पुष्प एवं मोमेंटो भेंट किए गए । इस कार्यक्रम में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं रजिस्ट्रार तथा कत्थक गुरू डॉ.शोभा कौसर के साथ तबला गुरु सुशील जैन तथा सितार वादक पंडित हरविंदर शर्मा भी उपस्थित थे । इन सभी ने कलाकारों की स्नेहपूर्ण शब्दों से सराहना की एवं सभी कलाकारों को उतरीया और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।