चंडीगढ़ : अस्थमा के लक्षण जीवन के किसी भी पड़ाव पर नजर आ सकते हैं। ऐसा क्यों होता है, इसके कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन एक बार अस्थमा के लक्षण सक्रिय हो जाते हैं तो विभिन्न परिस्थितियों में खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर लोग अस्थमा के खतरे को कम कर सकते हैं। विश्व अस्थमा दिवस की पूर्व संध्या पर साल्ट रूम थैरेपी सेंटर की सलाहकार डॉ. जसमीत कौर ने आज यहां यह जानकारी दी।
डॉ. जसमीत कौर ने बताया, ‘हम साल्ट रूम थैरेपी के जरिए लोगों को इस खतरनाक श्वास रोग के बारे में जागरूक करना चाहते हैं। इस थैरेपी के प्रयोग से उन्हें अस्थमा से निजात पाने में सहयोग करना चाहते हैं। इसके लिए हमारा सेंटर 7 मई यानी कि विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर अस्थमा के मरीजों को 50 प्रतिशत प्रति सेशन की विशेष छूट दे रहा है। साल्ट रूम थैरेपी के चंडीगढ़ व लुधियाना स्थित दोनों केंद्रों पर इस छूट का लाभ उठाया जा सकता है।’
अस्थमा श्वास नली में सूजन के कारण होता है। सूजन क्यों होती है, किसी को नहीं पता है, लेकिन यह सूजन श्वास नली की मांसपेशियों को प्रभावित करती है, और उनके सिकुडऩे का कारण बनती है। श्वास नली के सिकुडऩे से श्वास का फेफड़ों से अंदर-बाहर आने-जाने का रास्ता बाधित हो जाता है। श्वास नली में अतिरिक्त बलगम इकट्ठी होने से खांसी शुरू हो जाती है। फलस्वरूप सांस लेने में कठिनाई होती है।
अस्थमा का इलाज ऐलोपैथी से संभव नहीं है। अस्थमा व त्वचा संबंधी कई बीमारियों से पीडि़त मरीजों के लिए लंदन की साल्ट रूम थैरेपी एक उ मीद के रूप में सामने आयी है। नमक की दीवारों से बने एक कमरे में कुछ मिनट बिताकर मरीज न केवल तरोताजा महसूस कर सकते हैं, बल्कि बिना किसी साइड इफेक्ट के दवाइयों के सेवन से निजात पा सकते हैं।
विशिष्ट आयातित नमक के अति सूक्ष्म कणों को हवा में घोलने वाले उपकरण हेलोजेनेरेटर युक्त इस कमरे में नमक की प्राकृतिक खदान जैसा वातावरण तैयार किया जाता है। एक लेजर लाइट कक्ष में नमी, तापमान एवं नमक की मात्रा पर नियंत्रण रखती है। हेलोजेनेरेटर उपकरण से निकले नमक के सूक्ष्म कण आंख से नहीं देखे जा सकते, लेकिन वे सांस के साथ शरीर के अंतिम हिस्से तक पहुंच कर वहां के पानी को सोखने की क्षमता रखते हैं। साल्ट रूम में ऐसा अहसास होता है, मानो आप लद्दाख में बर्फ की किसी गुफा में बैठे हों। छह माह के शिशु को भी इस कक्ष में रखा जा सकता है। बच्चों के बैठने एवं नमक से खेलने की उचित व्यवस्था है। इस चिकित्सा से दवाओं पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है।