मुख्य आकर्षण 18 सितंबर बुधवार 6 बजे को टैगोर थियेटर में कलरीपायट्टु परफॉर्मेंस में आम जनता के लिए फ्री एंट्री होगी
*कर्टन रेजर परफॉर्मेंस में दिखी विश्व के प्राचीनतम मार्शल आर्ट कलरीपायट्टु की झलक
वल्लभट कलारी ग्रुप के संयोजक राजीव ने बताया कि उनके पिता को 2022 में पद्मश्री मिला था ,जिनकी विरासत को वह देशों ,विदेशों में प्रस्तुत कर रहे हैं। राजीव ने बताया उनके ग्रुप में कुल 9 कलाकार हैं सबसे वृद्ध 73 साल के और सबसे युवा 17 साल के इनमें दो म्यूजिशियन भी शामिल है।
कलरीपायट्टु विश्व के सबसे पुराने मार्शल आर्ट फॉर्म्स में से एक है। इसका जन्म केरल में करीब 1 हजार साल पहले हुआ था। इस प्राचीन कला से एक बेहद दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। प्राचीन लोक कथाओं के मुताबिक, जब भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी को अरब सागर में फेंका, तो उसमें से धरती का एक टुकड़ा उभरा, जो कि आगे चलकर केरल बना। ऐसे में, इस धरती की रक्षा के लिए उन्होंने 21 शिष्यों को कलरीपायट्टु की शिक्षा दी।
कलरी का अर्थ है रणभूमि और कलरीपयट्टू असल में एक प्राचीन युद्ध कला है। इसमें कॉम्बैट एंड डिफेंस टेक्निक्स तो हैं ही, साथ ही हैं हथियारों की ट्रेनिंग। इसके साथ ही, इसमें योग और हीलिंग टेक्निक का बेमिसाल मेल भी है। यही वजह है कि इसे मदर ऑफ ऑल मार्शल आर्ट्स भी कहा जाता है।
दरअसल कलरी सिर्फ योद्धा कला नहीं है, बल्कि तन, मन और मस्तिष्क को तंदुरुस्त और संतुलित रखने वाली कला भी है। साथ ही, यह केरल की तेय्यम और कथकली जैसी दूसरी कलाओं की प्रेरणा भी है , बताया स्मिथ मैके चंडीगढ़ चैप्टर के संयोजक अमूल्य शुक्ला ने। इसीलिए हम इन कलाकारों के जरिए ट्राई सिटी के स्टूडेंट्स को इस मार्शल आर्ट की शिक्षा से फोकस व कन्सन्ट्रेशन का पाठ पढ़ाना चाहते हैं , ताकि यह युवा आगे चलकर अपने-अपने क्षेत्र में पारंगत हो जाए।