पितृ श्राद्ध के अवसर पर पितृ मोक्ष महायज्ञ एवं श्री मद् भागवत कथा के भव्य आयोजन के उपलक्ष्य पर गंगोत्री के प्रसिद्ध कथा वाचक परम् पूज्य श्री सुरेश शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए बताया
समस्त सृष्टि केवल एक संगठन है जहां सभी परमाणु विशेष रूप में संगठित होकर विशेष तत्व बनाते हैं और उसके ये विशिष्ट रूप उनमें निश्चित गुण लाते हैं. मृत्यु, क्षय, रूपांतरण तब होता है जब परमाणु अपने रूप से ऊब कर फिर से संगठित होने का निश्चय करते हैं.
विक्रम संवत के नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है. इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था. इसमें मुख्यतया ब्रह्माजी और उनकी निर्माण की हुई
काल चक्र अविरल गति से घूमता है। भूतकाल की घटनाओं की केवल स्मृति ही रह जाती है।
परमात्मा से प्राप्तियां प्राप्त करने के लिए बुद्धि रूपी बर्तन शुद्ध होना चाहिए परमात्मा को महल, गाडिय़ां, पैसे कुछ नहीं चाहिए
ज़िंदगी में किसी भी वजह से आया बुरा वक्त बड़ा मुश्किल होता है। किंतु व्यावहारिक तौर पर इस सच्चाई को भी नकारा नहीं जा सकता कि अच्छाई का संग मिलने से ही बुराई दूर होने लगती है। इसी सोच व आस्था से हिन्दू धर्म परंपराओं में बुरे वक्त, हालात या बदहाली से बचने के लिए शिव उपासना मंगलकारी मानी गई है।