नयी दिल्ली - उच्चतम न्यायालय ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुये सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह को उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त नियुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई एवं न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना की खंडपीठ ने कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर उसके आदेश का पालन नहीं किया जाना बहुत ही दुखद है। यदि यह मान भी लें कि राज्य सरकार का इरादा अदालत के आदेश की अवहेलना करना नहीं भी था, तब भी आदेश पालन करने में संवैधानिक सरकार की असफलता दुखद है।
न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार के वकील कपिल सिब्बल का यह कहना कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में चयन मंडल ने गंभीर प्रयास किये लेकिन बैठक बेनतीजा रही, मानने योग्य नहीं है। श्री सिब्बल ने शीर्ष अदालत को पांच नाम दिये, जिस पर चयन मंडल की बैठक के दौरान विचार विमर्श किया गया था। न्यायालय ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के मौजूदा प्रमुख न्यायमूर्ति सिंह को लोकायुक्त नियुक्त कर दिया।
न्यायालय ने लोकायुक्त की नियुक्ति में हो रही विलंब के लिये सोमवार को उत्तर प्रदेश को कड़ी फटकार लगाते हुये उसे दो दिन के भीतर नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा था कि वह बुधवार तक लोकायुक्त की नियुक्ति करे या गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे।