नई दिल्ली - राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) अमित शाह को बेहद मेहनती नेता मानता है, यही वजह है कि शाह का भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर जमे रहना साफ नजर आ रहा है। दिसंबर में उनका कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और माना जा रहा है कि आरएसएस के प्रिय होने के कारण उन्हें दूसरा टर्म मिलना तय है। आरएसएस ने उन्हें बदलने का विरोध कर दिया है।
पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अमित शाह को अध्यक्ष बनाए रखने की बात का समर्थन किया था मगर अब संघ द्वारा भी अमित शाह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की बात का समर्थन किया गया। अमित शाह के कार्यकाल में भाजपा ने 6 चुनावों में से 4 में जीत हासिल की है। दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद अमित शाह को अध्यक्ष बनाए जाने पर भाजपा के वरिष्ठ सदस्यों ने अपनी आपत्ती ली थी।
हालांकि इस मामले में पार्टी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने वरिष्ठों की बात को महत्व देने के साथ ही इस बात को खारिज कर दिया था कि चुनावी हार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जिम्मेदार हैं। दरअसल अमित शाह को अध्यक्ष बनाए रखने के पीछे आरएसएस का तर्क है कि अमित शाह के नेतृत्व में हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में भाजपा को सीधी जीत दिलवाई जाए।