नर्ई दिल्ली - एक दिसंबर को दिल्ली में प्रदूषण का स्तर दुनिया के किसी भी शहर के प्रदूषण से ज्यादा रिकार्ड किया गया। सरकार ने भले ही इसकी अनदेखी कर दी लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए बृहस्पतिवार को तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे हम दिल्ली में नहीं किसी गैस चेंबर में रह रहे हैं।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कार्ययोजना पेश की जाए। उच्च न्यायालय के कठोर रुख के बाद शुक्रवार को केजरीवाल ने अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में दिल्ली के प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने गंभीर कदम उठाने का फैसला लिया। सरकार ने बढ़ते प्रदूषण से निबटने के लिए एक जनवरी से नई नीति को लागू करने का फैसला किया है।
सरकार का मानना है कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण निजी वाहन हैं। निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए सरकार ने फैसला किया है कि कोई भी वाहन मालिक दिल्ली की सड़कों पर रोज अपना वाहन नहीं चला पाएगा।