नई दिल्ली - केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने राज्यसभा में सोमवार को स्वीकार किया कि समाज में थोड़ी बहुत असहिष्णुता है, जिसे उसी स्थान तक सीमित करने और उससे कड़ाई से निपटने की जरूरत है। मंत्री ने हालांकि कहा कि निपटने के बजाय इस मुद्दे को हवा दिया जा रहा है और भारत की किरकिरी कराई जा रही है। भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती को लेकर 'संविधान के प्रति प्रतिबद्धता' पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा, "विभिन्न इलाकों में समाज में थोड़ी बहुत असहिष्णुता है, जिसकी पहचान करनी है, उसे उसी जगह तक सीमित रखना है और उसके साथ कड़ाई से पेश आना है।"
उन्होंने कहा, "ऐसा करने के बदले हम उसे और तूल देने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे भारत की किरकिरी हो रही है और यह राष्ट्रहित में ठीक नहीं।" नायडू ने कहा, "सदन में जब असहिष्णुता पर चर्चा होगी अन्य वरिष्ठ सदस्य इसे ध्यान में रखेंगे। मैं केवल उनसे अपील कर रहा हूं। चलिए, हम एक दूसरे के साथ सहिष्णु हों और तभी हम लोगों के जनादेश के साथ सहिष्णु होंगे।" उन्होंने कहा, "मेरे अनुसार, सबसे बड़ी सहिष्णुता संविधान का आदर लोगों के जनादेश का आदर है।" मंत्री ने कहा, "इसका एक महत्वपूर्ण पहलू लोगों के जनादेश का आदर करना है। अन्य लोगों की आस्था का आदर करना है।"