नई दिल्ली - भारत के पूर्व राष्ट्रपति दिवगंत एपीजे अब्दुल कलाम को लेकर एक खुलासा हुआ है। खुलासा उनके पूर्व प्रेस सेक्रेटरी एसएम खान ने किया है। खान ने खुलासा करते हुए कहा कि कलाम साल 2006 में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना चाहते थे। अभी आरएनआई के डीजी पद पर कार्यरत खान ने एक यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए यह खुलासा किया है।
खान का कहना है कि बिहार के राज्यपाल बूटा सिंह ने वहां कि विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की थी। जिससे कैबिनेट ने मंजूरी करके, राष्ट्रपति को हस्ताक्षर के लिए भेजा था। शुरुआत में कलाम उस पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने उस पर हस्ताक्षर कर दिए। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के बिहार विधानसभा को भंग करने के आदेश को खारिज कर दिया। तब राष्ट्रपति कलाम को लगा था कि उन्हें हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए था।
खान के मुताबिक इस मसले पर कलाम ने रामेश्वरम में रह रहे अपने बड़े भाई से बात की थी। उनके बड़े ऐसे किसी भी कदम से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि अगर कलाम पद से इस्तीफा देते हैं तो संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है। जिसके बाद कलाम ने अपने बड़े भाई की बात को मानते हुए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जिससे कोई विवाद पैदा हो।