नयी दिल्ली 21 मार्च : मुंबई में 1993 के बम विस्फोट कांड से संबंधित मामले में सिने अभिनेता संजय दत्त को तीन साल से अधिक जेल में बिताना होगा क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने शस्त्र कानून के तहत उन्हें दोषी ठहराने का टाडा अदालत का निर्णय बरकरार रखा है.
मुंबई बम विस्फोटों के बारे में कहा जाता है कि पाकिस्तानी आईएसआई की सक्रिय भूमिका से दाउद इब्राहिम और उसके साथियों ने इसे अंजाम दिया था. न्यायालय ने कहा कि संजय दत्त का अपराध इतने गंभीर किस्म का है कि उन्हें इस मामले में प्रोबेशन पर रिहा नहीं किया जा सकता. लेकिन न्यायालय ने उनकी सजा छह साल से घटाकर पांच साल कर दी. न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति डा बलबीर सिंह चौहान की खंडपीठ ने अपने फैसले में फरार षड़यंत्रकारी टाइगर मेमन के भाई याकूब अब्दुल रजका मेमन की मौत की सजा और उम्र कैद की सजा पाने वाले 18 मुजरिमों में से 16 की सजा बरकार रखी.
न्यायालय ने 10 अन्य मुजरिमों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया लेकिन स्पष्ट किया कि वे आजीवन जेल में ही रहेंगे. न्यायालय ने अशरफुर रहमान अजीमुल्ल की उम्र कैद की सजा घटाकर दस साल कर दी जबकि यूनुसमिया घावते की सजा जेल में बितायी गयी अवधि तक सीमित करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया. न्यायाधीशों ने कहा, परिस्थितियां और अपराध का स्वरुप इतना गंभीर है कि हमारी राय में उन्हें (संजय दत्त को) प्रोबेशन पर रिहाई के लिए परिवीक्षा कानून का लाभ नहीं मिल सकता. न्यायालय ने संजय दत्त को आज से चार सप्ताह के भीतर समर्पण करने का आदेश दिया है. संजय दत्त पहले ही 18 महीने जेल में बिता चुके हैं.