नई दिल्ली - केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि साइबर सुरक्षा आज देश की सबसे बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए केंद्र सरकार 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र'' (आई-4सी) के गठन की तैयारी कर रही है। इससे साइबर अपराधों की निगरानी करने तथा कानून लागू कराने वाली एजेंसियों को अपराधों को रोकने में मदद मिलेगी। राजनाथ सिंह ने आज राजधानी में एशिया के प्रथम सूचना सुरक्षा सम्मेजलन ग्राउंड जीरो सम्मेलन 2015 का उद्घाटन के अवसर पर कहा कि कहा कि इंटरनेट के जरिये सूचना का स्वतंत्र रूप से आदान-प्रदान होता है और इस तरह की सूचना पर न तो सीमा प्रहरियों, कस्टयम या अप्रवासी अधिकारियों का नियंत्रण है।
डिजिटल इंडिया- सुरक्षित डिजिटल इंडिया पर आधारित इस सम्मेलन का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के विकास से पैदा हुए साइबर क्राइम तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों ओर चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है। गृहमंत्री ने कहा कि ऐसे में इंटरनेट के जरिये अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले अपराधियों की पहचान नहीं हो पाती है। परस्पगर रूप से जुड़े इस विश्वन में यह अपराधी अलग-अलग हो सकते हें लेकिन उनका एक ही उद्देश्य होता है, देश और देशवासियों को नुकसान पहुंचाना।
सरकार द्वारा इस दिशा में की गई कुछ पहलों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने साइबर स्पेस के लिए कानून बनाने की नीति बनाई है। सरकार ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक डा. गुलशन राय की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया गया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने ''भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र'' (आई-4सी) के गठन करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।