भोपाल - प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में वेंटीलेटर की खरीद में जबरदस्त धांधली का खुलासा हुआ है। दरअसल चिकित्सा शिक्षा विभाग ने हाल ही में प्रदेश के छह कॉलेजों को कुल 30 वेंटीलेटर खरीदने की स्वीकृति प्रदान की थी। इस आदेश के अनुसार ज्यादातर कॉलेजों में वेंटीलेटर खरीदे जा चुके हैं जबकि कुछ में खरीदी की प्रक्रिया जारी है। इस इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि शासन ने एक वेंटीलेटर पर 10 लाख 10 हजार रुपए खर्च किए हैं जबकि यही वेंटीलेटर दूसरी कंपनी 8 लाख 26 हजार रुपए देने को तैयार दी थी।
इस प्रकार शासन को दूसरी कंपनी से खरीदी में 50 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगी है। कंपनी ने अब शासन के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। दरअसल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में उपकरणों की खरीदी के लिए रेट तय करने की जिम्मेदारी केन्द्रीय क्रय समिति इंदौर एवं मेडिकल कार्पोरेशन को दी गई है। ये दोनों संस्थाएं अलग-अलग एजेंसियों से टेंडर बुलाकर स्वीकृत करती हैं।
केन्द्रीयकृत समिति ने साइंटिफिक सप्लाई एंड मेनुफेक्चिरिंग कंपनी का रेट स्वीकृत किए थे। इसके तहत एक वेंटीलेटर की कीमत 8 लाख 26 हजार रखी गई थी। जबकि मेडिकल कार्पोरेशन ने एक दूसरी कंपनी कोवीडियंस हेल्थ केयर इंडिया के रेट स्वीकृत किए थे। इस कंपनी ने एक वेंटीलेटर की कीमत 10 लाख 10 हजार रखी थी। इस प्रकार एक वेंटीलेटर की खरीद पर शासन को दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है। खास बात यह है ज्यादा रेट वाली कंपनी से वेंटीलेटर खरीदने का निर्णय 9 सितम्बर को प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में आयोजित चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक में हुआ था।