लखनऊ - महिलाओं से बढ़ते बलात्कार के मामलों को देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया। यह फैसला बलात्कार पीडि़ताओं के पक्ष में सुनाया गया। फैसले के अनुसार अब बलात्कार से जन्मे बच्चे को अपने जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह फैसला उस पर्सनल लॉ के अनुसार होगा, जिससे बच्चे का ताल्लुक है।
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि उस बच्चे को अपने जैविक पिता की नाजायज संतान माना जाएगा। अगर बच्चे को कोई और गोद लेता है तो फिर बच्चे के पास पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नही होगा। एक 13 साल की बलात्कार पीडि़ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जस्टिस साबिलहुल हसनैन और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिए है कि वो इस बच्ची को 10 लाख रुपये अदा करे। कोर्ट ने सरकार को बच्ची के व्यस्क हो जाने पर उसे नौकरी दिलाने की भी बात की है।