नई दिल्ली - कालेधन पर विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि फर्जी कंपनियों और बोगस निदेशकों की आड़ में ब्लैकमनी का खेल खेला जा रहा है। भारत और विदेशों में काले धन की रोकथाम के उपाय पर सीबीटीडी के अध्यक्ष के नेतृत्व में गठित समिति ने वर्ष 2012 में अपनी विशेष रिपोर्ट में कहा कि 20 कंपनियां एक ही पते पर चल रही हैं।
2,627 लोग ऐसे हैं जो 20 से ज्यादा कंपनियों में निदेशक हैं। इसके अलावा एक ही व्यक्ति 20 से ज्यादा कंपनियों में निदेशक भी हैं। इस रिपोर्ट में कहा है कि कानून लागू करने वाली और गुप्तचर एजेंसियों द्वारा अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसके साथ ही एसआईटी ने सीबीडीटी, सीबीईसी और प्रवर्तन निदेशालय से भी आग्रह किया है कि वे उक्त कंपनियों के आंकड़ों के बारे में सतर्कता से काम करें। रिपोर्ट में कहा गया है कि काले धन के स्रोत का पहला तरीका यह है कि रसीदें नहीं बनायी जातीं और खर्चों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है।
रसीदें न तैयार करने के दायरे में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियां आती हैं, जिन्हें सामान्य रूप से बिक्री रसीदों, वास्तविक उत्पादन, आवश्यक रकम की तुलना में वसूली आदि को नियमानुसार तर्क संगत बनाना आवश्यक होता है। इसके साथ ही रसीदों को दबा देने से हर बार आय में हेरफेर करना संभव नहीं होता, इसलिए करदाता खर्चा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाते हैं और इसके लिए बिल बनाने वाले व्यक्तियों से फर्जी रसीदें बनवा लेते हैं। रसीद बनाने वाले मामूली कमीशन पर फर्जी रसीदें बना देते हैं।