नई दिल्ली - कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में मंगलवार को पार्टी नेताओं ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक एक मार्च निकाला। इसके जरिए कांग्रेसी नेताओं ने देश में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा के खिलाफ विरोध दर्ज किया। इस दौरान पार्टी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर अपनी चिंता भी व्यक्त की। कुछ लोग तनाव पैदा कर रहे राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उनसे अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर असहिष्णुता का माहौल खत्म करने की अपील की।
मुलाकात के बाद सोनिया गांधी ने कहा, 'आज देश में डर का माहौल है। कुछ असमाजिक तत्व जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस ऐसे लोगों से पूरी ताकत के साथ लड़ेगी। इस मुद्दे को लेकर हमने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा है।' इस दौरान पार्टी नेताओं ने देश में बढ़ती असहनशीलता पर चिंता जताते हुए पीएम पर चुप्पी साधने के आरोप लगाए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पीएम की चुप्पी से लगता है कि ऐसे मामलों में उनकी भी सहमति शामिल है।'
पूरे देश का मुद्दा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'दो बच्चों की मौत हो गई और केंद्र सरकार के एक मंत्री उनकी तुलना कुत्ते से करते हैं। पीएम भी कुछ नहीं कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल कांग्रेस पार्टी का नहीं बल्कि पूरे देश का है। पीएम को ऐसे मामलों पर बोलना जरूरी नहीं लगता। पीएम और वित्तमंत्री को लगता है कि कुछ हुआ ही नहीं है।' मोदी विरोधी नारों वाली तख्तियां इस मार्च में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शामिल हुए। मार्च कड़ी सुरक्षा में निकाला गया। इस दौरान कई नेताओं ने हाथ में तख्तियां ले रखी थीं, जिनमें सरकार विरोधी नारे लिखे थे। बाद में कांग्रेस का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा।