लखनऊ - समाजवादी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तरह तरह के इल्जाम और तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंत्रिमंडल में जिन नए सदस्यों को शामिल किया गया है या जिनका कद बढ़ाया गया है, वह कोई ऐसा वैसा फैसला नहीं है जिसे एक परिवार की मनमर्जी करार दे दिया जाए या सियासत के दूरगामी परिणामों को सोचे-समझे बगैर उठाया गया कदम मान लिया जाए।
पिछले छब्बीस-सत्ताईस सालों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपरिहार्य व्यक्त्वि बन चुके समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव अपनी पार्टी और अपने मुख्यमंत्री पुत्र के हितों की अनदेखी करके कोई काम करेंगे, यह कैसे संभव है। जो लोग मंत्रिमंडल विस्तार पर अंगुलियां उठा रहे हैं, शायद वह मुगालते में हैं या फिर वह उनका अपना नजरिया हो सकता है, पर नेताजी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। कोई माने न माने, मंत्रिमंडल विस्तार से एक बात साफ हो गई है कि समाजवादी सरकार में नेताजी के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही ताकतवर नेता हैं, वही भविष्य में भी पार्टी का चेहरा होंगे।