नई दिल्ली - पंद्रह साल पहले भटक कर सरहद पार पहुंच गई आठ साल की मासूम बच्ची सोमवार को 23 साल की युवती गीता के रूप में अपने वतन लौटेगी, लेकिन मां बाप से मिलने से पहले उसे खून का इम्तिहान देना होगा। गीता को यात्रा दस्तावेज मिल गए हैं। वह कराची में मोहम्मद अली जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से स्थानीय समयानुसार सोमवार सुबह आठ बजे पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की उड़ान संख्या पीके-272 से रवाना होगी और एक घंटे 50 मिनट बाद 10:20 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेगी।
उसे सालों से पनाह दे रहे स्वयंसेवी संगठन ईधी फाउंडेशन के पांच प्रतिनिधि भी उसके साथ आ रहे हैं, जिन्हें भारत सरकार के मेहमान का दर्जा दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित भी हवाई अड्डे पर मौजूद रहेंगे। गीता के माता-पिता होने का दावा कर रहे बिहार के सहरसा निवासी शांति देवी और जनार्दन महतो पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। गीता को हवाई अड्डे से विदेश मंत्रालय लाया जाएगा जहां उसे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी में महतो परिवार से मिलवाया जाएगा। मेलमिलाप और दोपहर के भोजन के बाद श्रीमती स्वराज गीता के साथ मीडिया से मुखातिब होंगी, लेकिन डीएनए परीक्षण में माता-पिता की पुष्टि होने के पहले उसे श्री महतो को सौंपा नहीं जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक गीता के आते ही सबसे पहले उसके रक्त का नमूना लेकर उसे सीधे हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री भेजा जाएगा, जहां उसके डीएनए की जांच कराई जाएगी। महतो परिवार के रक्त के नमूने पहले ही डीएनए की जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक दो दिन में उसकी रिपोर्ट भी आ जाएगी। यह पूछे जाने पर कि एक मानवीय त्रासदी से गुजरने के बाद उस मासूम के लिए अपनों से मिलने के खुशनुमा और भावनाओं से भरे मौके पर खून का इम्तिहान लिए जाने की शर्त कितनी बेदर्द है, सूत्रों ने कहा कि एक कहानी में तो ये वाकई बेदर्द और क्रूर बात लग सकती है, लेकिन यह गीता की जिंदगी का सवाल है। इसके लिए विज्ञान एवं तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, ताकि भविष्य में कोई अपवाद न रहे।