हरिद्वार - हरिद्वार की प्रसिद्ध दक्षिण कालीपीठ पर पशुबलि समाप्त कर दी गई है। इस तंत्र पीठ पर करीब 800 वर्षों से पशुबलि हो रही थी। मंगलवार को दक्षिण कालीपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने स्वयं यह घोषणा की। बीते कई सालों से कई संगठन इसका विरोध भी करते आ रहे थे। उत्तर भारत में दक्षिण कालीपीठ का लंबा इतिहास रहा है। विश्वविख्यात तंत्र सम्राट बाबा कामराज की यह कर्मभूमि रही है।
मान्यता है कि बाबा कामराज आज भी मंदिर क्षेत्र में विद्यमान है जबकि बाबा इस क्षेत्र में 800 वर्ष पूर्व रहा करते थे। उत्तर भारत की यह एक मात्र ऐसी सिद्ध पीठ है जहां दो प्रकट और दो गुप्त (चारों) नवरात्रों में तंत्र साधना की जाती है। यूं तो वर्षभर इस पीठ पर मांगलिक एवं तांत्रिक अनुष्ठान चलते रहते हैं। दक्षिण कालीपीठ पर वामपंथी पुजारियों का जमावड़ा रहता है। हरिद्वार का यह एक मात्र मंदिर है जहां पशुबलि की परंपरा रही है। कई वर्षों से विभिन्न संगठन इसका विरोध करते आ रहे हैं। उत्तराखंड के शेष मंदिरों में बलि प्रथा समाप्त हो चुकी है। मंगलवार को दक्षिण कालीपीठ में भी बलि प्रथा समाप्त करने की घोषणा की गई। इस घोषणा का धर्म क्षेत्र में स्वागत किया गया। कालीपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने की घोषणा