मुंबई - भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध बहाल करने की कोशिश का राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों की सोमवार को होने वाली मुलाकात से पहले शिवसेना ने मुंबई में बीसीसीआई आफिस में घुसकर प्रदर्शन किया। हंगामे के बाद दोनों बोर्डों के अधिकारियों की बैठक रद्द करनी पड़ी। पाकिस्तान के खिलाफ अपनी मुहिम को जारी रखते हुए शिवसेना कार्यकर्ताओं ने द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली के लिए पीसीबी प्रमुख शहरयार खान के साथ प्रस्तावित बातचीत के विरोध में यहां भारतीय क्रिकेट बोर्ड के मुख्यालय में घुसकर प्रदर्शन किया।
नारे लगाते हुए सैकड़ों शिवसेना कार्यकर्ता सोमवार को बोर्ड के मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष शशांक मनोहर का घेराव भी किया। पाकिस्तान और पीसीबी अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिवसेना कार्यकर्ताओं ने बीसीसीआई प्रमुख शशांक मनोहर से पाकिस्तान से किसी तरह का क्रिकेट संबंध नहीं रखने के लिए कहा। उनका कहना था कि पाकिस्तान आतंकवाद का प्रायोजक है। काले और केसरिया झंडे लेकर शिवसेना कार्यकर्ता बोर्ड के दफ्तर पहुंचे थे। शिवसेना के विभाग प्रमुख पांडुरंग सकपाल ने पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी का रवैया साफ है कि दोनों देशों के बीच कोई क्रिकेट नहीं होना चाहिए।
उधर, बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने मुंबई में बोर्ड मुख्यालय में शिव सैनिकों के जोरदार हंगामे की निंदा करते हुए कहा है कि बीसीसीआई और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के बीच दिल्ली में कोई बैठक नहीं होनी है और पीसीबी के साथ वार्ता रद्द हो गई है। इसी बीच भारत-पाक के बीच क्रिकेट सीरीज की संभावना तलाशने आए पीसीबी प्रमुख शहरयार खान के साथ बैठक के विरोध में बीसीसीआई मुख्यालय में शिवसेना के हंगामे पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा ने इस हमले की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र से शिवसेना को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग कर डाली है।
पंजाब प्रांत की विधानसभा में सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें पाकिस्तान से संबंधित कार्यक्रमों में शिवसेना के हमलों की निंदा की गई। प्रस्ताव में बीसीसीआई दफ्तर में शिवसेना के हमले की भी आलोचना की गई। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र से मांग की गई है कि वह शिवसेना को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगाए।