नई दिल्ली - भूतपूर्व राष्टपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 84 वीं जयंती पर डीआरडीओ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कलाम की कमी को भरना एक चुनौती है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने डॉ. कलाम के गांव में एक स्मारक बनाए जाने की घोषणा भी की। पीएम मोदी ने कहा कि डॉ. कलाम राष्टपति से पहले राष्टरत्न थे। वे खुद को एक शिक्षक के रूप में देखते थे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कलाम नहीं चाहते थे कि हथियारों के दम पर भारत की पहचान बने।
वो चाहते थे कि शिक्षा और मानव संपन्नता का तालमेल हो। गौरतलब है कि इसी साल 27 जुलाई को डॉ. कलाम का निधन हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कलाम की जयंती पर युवा वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे देश की विरासत एवं तकनीक के ज्ञान का उपयोग करके विश्व को नए तकनीकी समाधान उपलब्ध करायें। वैज्ञानिकों को अपनी सोच में कुछ ऊपर उठ कर यह सोचना चाहिए कि हमारी ऐसी कौन सी विरासत है जिसे विश्व को दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया साइबर अपराधों से परेशान है तो क्या हमारे नौजवान साइबर सुरक्षा के मामले में उसे कुछ समाधान दे सकते हैं। आज के वक्त में जितनी जरूरी सीमाओं की सुरक्षा है, उतनी ही महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा है। मोदी ने कहा कि युवा वैज्ञानिकों को 'ब्लू इकोनॉमी' यानी सामुद्रिक अर्थव्यवस्था और 'ब्लू स्काई' यानी प्रदूषण रहित पर्यावरण अनुकूल विकास के लिये भी सोचना होगा।