नयी दिल्ली - बढती साम्प्रदायिक घटनाओं और साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवियों पर हाल में हुए जानलेवा हमलों के विरोध में अंग्रेजी के सुप्रसिद्ध कवि के की एन दारुवाला ,राजस्थानी के जाने माने लेखक नंद भारद्वाज,कन्नड़ के प्रसिद्ध लेखक के वीर भद्रप्पा ,के नीला , आर के हुदुंगी तथा काशीनाथ अम्वालजी ने भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए हैं । इन्हें मिलाकर अकादमी पुरस्कार लौटाने वालों की संख्या बढ़कर 33 हो गयी है ।
1937 में लाहौर में जन्मे श्री दारुवाला मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल के बाद अंग्रेजी के दूसरे शीर्षस्थ लेखक हैं जिन्होंने यह पुरस्कार लौटाया है । उन्होंने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को लिखे पत्र में अपने पुरस्कार को लौटाने की घोषणा की है । श्री दारुवाला ने अपने पत्र में कहा है कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ाव नहीं है । वह भ्रष्ट संप्रग सरकार- दो के समर्थक नहीं है लेकिन इस देश में कभी एम एफ हुसैन जैसे पेंटर तो कभी तसलीमा नसरीन जैसी लेखिका को वाम सरकार में कोलकाता छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ता है ।
उन्होंने संस्कृति मंत्री महेश शर्मा के उस बयान की भी कड़ी निंदा की है जिसमें उन्होंने लेखकों को न लिखने की बात कही थी । राजस्थानी के लेखक नंद भारद्वाज ने साहित्य अकादमी को लिखे पत्र में कहा है कि वह 50 हजार रुपए की पुरस्कार राशि भी लौटा रहे हैं जो 2004 को उनके उपन्यास '' सम्ही खुलतो मारग'' के लिए मिहली थी ।