कलबुर्गी की हत्या और दादरी काण्ड के विरोध में साहित्य पुरस्कार लौटने वालों में तीन और लेखक शामिल हो गए है. पंजाब से तीन और प्रख्यात लेखकों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की रविवार को घोषणा की, जबकि कन्नड़ लेखक अरविंद मलगत्ती ने संस्था की आम परिषद से इस्तीफा दे दिया है।
तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या पर साहित्य अकादमी की चुप्पी को लेकर साहित्यिकारों ने विरोध तेज कर दिया है, वहीं इसके अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि शीर्ष साहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है और कहीं भी किसी लेखक या कलाकार पर हमले की निंदा करती है। इसने संविधान में निहित ‘मूल धर्मनिरपेक्ष मूल्यों’ और ‘सभी के जीवन के अधिकार’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
प्रख्यात लेखक गुरबचन भुल्लर, अजमेर सिंह औलख और आत्मजीत सिंह ने नयनतारा सहगल, सारा जोसफ, उदय प्रकाश और अशोक वाजपेयी जैसे कई अन्य लेखकों की तरह अपना पुरस्कार लौटाने की घोषणा की।
उन्होंने मांग की है कि अकादमी अपने सदस्य कलबुर्गी और अन्य तर्कवादियों की हत्या के खिलाफ तथा दादरी कांड के मद्देनजर साम्प्रदायिक माहौल के खिलाफ अपना बयान जारी करे।
भुल्लर ने कहा कि वह देश के सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने की कोशिशों को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने कहा कि वह देश में बनाए जा रहे साम्प्रदायिक माहौल को लेकर बहुत परेशान हैं और केंद्र सरकार एक धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक देश का प्रतिनिधि होने के तौर पर अपना कर्तव्य नहीं निभा रही है।
भुल्लर ने कहा कि हाल के समय में देश के सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने की कोशिशों और एक कार्ययोजना के तहत साहित्य और संस्कृति को खासतौर पर निशाना बनाए जाने ने उन्हें चिंतित कर दिया है। पंजाब के बठिंडा में जन्में 78 वर्षीय भुल्लर को उनकी लघु कथा पुस्तक ‘अग्नि कलश’ को लेकर 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।