नई दिल्ली -देश की सांस्कृतिक विविधता पर पैदा हुए खतरे को लेकर नाराजगी जताते हुए जाने-माने साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया है। राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के पूर्व प्रमुख अशोक वाजपेयी का कहना है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत पर जिस शातिराना तरीके से हमले हो रहे हैं, उसे देखते हुए अब लेखकों के लिए स्टैंड लेने का वक्त आ गया है।
इससे पहले मंगलवार को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की भानजी नयनतारा सहगल ने भी साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा दिया था। मशहूर कवि अशोक वाजपेयी ने दादरी में बीफ की अफवाह फैलने के बाद अखलाक की हत्या की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमारे पीएम लाखों लोगों को संबोधित करते हैं। बहुत वाकपटु हैं। कई मुद्दों पर अपनी राय भी रखते हैं, लेकिन संस्कृति पर हो रहे हमलों को लेकर वह चुप क्यों हैं? पीएम कुछ क्यों नहीं बोलते? निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है, लेखकों को मारा जा रहा है, उनके मंत्री भडक़ाऊ बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन पीएम चुप हैं।
देश की गंगा-जमुनी तहजीब की तरफ इशारा करते हुए वाजपेयी ने कहा कि यह देश बहुवचन है और बहुवचन ही रहेगा। अवार्ड लौटाने पर उन्होंने कहा कि जब नयनतारा सहगल इस मामले में सख्त कदम उठा सकती हैं तो हिंदी के लेखकों को भी उनका समर्थन करने की जरूरत है। वाजपेयी को उनकी कविताओं के लिए साल 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। मंगलवार को साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने वाली नयनतारा सहगल ने देश के तर्कबुद्धिवादी विचारकों और लेखकों की हत्याओं पर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी, अंधविश्वासों के विरुद्ध अभियान चलाने वाले नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या कर दी गई। एक अन्य लेखक को धमकियां मिल रही हैं। कहा जा रहा है कि अब अगला नंबर उसका है। उन्होंने आगे कहा कि अंधविश्वास के खिलाफ बोलने वाले लोगों की हत्या कर दी जाती है। अब जो इसका विरोध कर रहे हैं, वे डरे-सहमे हैं। मैं इन सब लोगों के समर्थन में अपना साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा रही हूं। नयनतारा को उनके नॉवेल रिच लाइक अस के लिए 1986 में साहित्य अकादमी अवार्ड दिया गया था।
अब तक साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस करने वालों में अशोक वाजपेयी, नयनतारा सहगल, उदय प्रकाश, वीरान्ना माडीवलार, टी सतीश जावरे गौड़ा, संगामेश मेनासिखानी, हनुमंत हालीगेरी, श्रीदेवी वी अलूर, चिदानंद शामिल हैं।